रविवार, 17 नवंबर 2013

muktak : sanjiv

​श्री कीर्तिवर्धन अगरवाल के प्रति:
मुक्तक सलिला:
संजीव
*
कीर्ति वर्धन हो सभीकी चाह है यही
चुप करते चलो काम शुभ की राह है यही
आलस न करो, परिश्रम से हाथ मिला लो-
'संजीव' ज़िन्दगी की परवाह है यही.
*
सीधी सरल शख्सियत है मित्र आपकी
शालीनता ही खासियत है मित्र आपकी
हँसकर गले मिले तो अपना बना लिया-
मुस्कान में रूमानियत है मित्र आपकी
*
साथ लक्ष्मी के शारदा की साधना
पवन बहुत है साथ निभाने की भावना
है साथ जवानों के सारा जहाँ 'सलिल'
दें साथ बुजुर्गों का सदा मनोकामना
*
नम आँख देखकर हमारी आँख नम हुई
दिल से करी तारीफ मगर वह भी कम हुई
हमने जलाई फुलझड़ी 'सलिल' ये क्या हुआ
दीवाला हो गया है वो जैसे ही बम हुई.
*
संजीव वर्मा 'सलिल'
२०४ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन
जबलपुर ४८२००१
०७६१ २४१११३१ / ९४२५१ ८३२४४

कोई टिप्पणी नहीं: