सोमवार, 1 फ़रवरी 2016

laghukatha

लघुकथा -
विक्षिप्तता की झलक
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सड़क किनारे घूमता पागल प्राय: उसके घर के समीप आ जाता, सड़क के उस पार से बच्चे को खेलते देखता और चला जाता। उसने एक-दो बार झिड़का भी पर वह न तो कुछ बोला, न आना छोड़ा।

आज वह कार्यालय से लौटा तो सड़क पर भीड़ एकत्र थी, पूछने पर किसी ने बताया वह पागल किसी वाहन के सामने कूद पड़ा और घायल हो गया। उसका मन हुआ कि देख ले अधिक चोट तो नहीं लगी किन्तु रुकने पर किसी संभावित झंझट की कल्पना कर बचे रहने के विचार से वह घर पहुँचा तो देखा पत्नि बच्चे की मलहम पट्टी कर रही थी। उसने बिना देर किये बताया कि सड़क पार करता बच्चा कार की चपेट में आने को था किंतु वह पागल बीच में कूद पड़ा, बच्चे को दूर ढकेल कर खुद घायल हो गया। अवाक रह गया वह, अब उसे अपनी समझदारी की तुलना में बहुत अच्छी लग रही थी पागल में विक्षिप्तता की झलक
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