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शुक्रवार, 20 सितंबर 2013

pitru tarpan (shraddh): SANJIV


लेख
- : पितृ-तर्पण : -
पितृ तर्पण विधि:
पितृ पक्ष की अवधि में मन-वचन तथा कर्म से सात्विक आचरण कर तामसिक वृत्तियों को नियंत्रित कर पूर्वजों के स्मरण तथा ईश-स्मरण की परंपरा है. प्रति दिन पूर्वजों का आव्हान  कर उन्हें जलांजलि तथा निर्धनों को दान देने का प्रावधान है.                 

पितृ पक्ष अर्थात पूर्वजों की स्मृति को समर्पित पखवाड़ा (१५ दिन) भाद्रपद (भादों) माह के कृष्णपक्ष के १५ दिन, श्राद्ध अर्थात श्रृद्धापूर्वक किया गया कार्य। पितृ पक्ष का अंतिम दिन सर्व पितृ अमावस्या या महालय अमावस्या कही जाती है. श्राद्ध कई प्रकार के होते हैं जिनमें प्रमुख एकोदिष्ट, अनावष्टक तथा पार्णव  प्रमुख हैं. एकोदिष्ट श्राद्ध वर्ष में एक दिन नियत तिथि को किया जाता है. सौभाग्यवती स्त्रियों हेतु अनावष्टक श्राद्ध नवमी तिथि को किया जाता है. पितरों हेतु पार्णव श्राद्ध किये जाने का विधान है. 

सामान्य नियम :
गया में किसी भी समय श्राद्ध कर्म का विशेष महत्त्व है-  'गया सर्वकालेषु पिण्डं दधाद्विपक्षणं'
पौराणिक कथा है राजा भागीरथ अपने अभिशप्त पूर्वजों की मुक्ति हेतु स्वर्ग से गंगा को धरा पर लाये थे.  
पितृ पक्ष में किसी भी शुभ कार्य के श्री गणेश या संपादन का निषेध है. 
तर्पण विधि TARPAN  vidhi :  

आवाहन Awahan:

दोनों हाथों की अनामिका (छोटी तथा बड़ी उँगलियों के बीच की ऊँगली, ring finger) में कुश (एक प्रकार की घास) की पवित्री (ऊँगली में लपेटकर दोनों सिरे ऐंठकर अँगूठी की तरह छल्ला) पहनकर, बायें कंधे पर सफेद वस्त्र डालकर  दोनों हाथ जोड़कर अपने पूर्वजों को निम्न मन्त्र से आमंत्रित करें-
 First wear pavitree (ring of kushaa- e typa of grass) in ring fingers of both the hands and place a whitk cloth piece on right shoulder. Now invite (call) your ancestor’s spirit by praying (fold your hand) through this mantra: 
  'ॐ आगच्छन्तु मे पितर एवं ग्रहन्तु जलान्जलिम'  
ॐ हे पितरों! पधारिये तथा जलांजलि ग्रहण कीजिए।  
  “Om Aagachchantu Me Pitar Eam Grihanantu Jalaanjalim.” 
'OM! my forefathers! please arrive and accept my offeringa with holy water

तर्पण:  जल करें  Tarpan (offer Water)

किसी पवित्र नदी, तालाब, झील या अन्य स्रोत (गंगा / नर्मदा जल पवित्रतम माने गए हैं) के शुद्ध जल में थोडा सा दूध, तिल तथा जवा मिलाकर बनाया गया तिलोदक निम्न में से प्रत्येक को 3 बार क्रमशः पूर्व, उत्तर तथा दक्षिण दिशाओं में जलांजलि अर्पित करें।
 Now offer water taken from any natural source river, tank, lake etc.( Ganga / narmada Jal considered most pious) mixed with little milk, java & Til  : 3 times for each one in east, north & south directions.


पिता हेतु  For Father: 
 (गोत्र नाम) गोत्रे अस्मतपिता पिता का नाम ................ शर्मा वसुरूपस्त्तृप्यतमिदं तिलोदकम (गंगा/नर्मदा जलं वा) तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः।

 ........... गोत्र के मेरे पिता श्री ............. वसुरूप में तिल तथा पवित्र जल ग्रहण कर तृप्त हों।
तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः।

“gotra name  Gotrah Asmat Pita (mine father) name of father  ........ Sharma Vasuroopastripyatamidam Tilodakam (Ganga Jalam Vaa) Tasmey Swadha Namah, Tasmey Swadha Namah, Tasmey Swadha Namah.”
 

Tilodakam: Use water mixed with milk java & Til ( water taken fromGanga / narmada rivers cosidered best) Tasmey Swadha Namah recite 3 times while leaving (offering) water from hand
  
pitamah (dada / babba) hetu To Grand Father:  

उक्त में अस्मत्पिता के स्थान पर अस्मत्पितामह पढ़ें  Replace AsmatPita with Asmatpitamah वसुरूपस्त्तृप्यतमिदं के स्थान पर रूद्ररूपस्त्तृप्यतमिदं पढ़ें Replace Vasuroopastripyatamidam with Rudraroopastripyatamidam पिता के नाम के स्थान पर पितामह  का नाम लें Replace Father’s name  with Grand Father’s Name 


माता हेतु  तर्पण Tarpan to Mother



(गोत्र नाम) गोत्रे अस्मन्माता माता का नाम देवी वसुरूपास्त्तृप्यतमिदं तिलोदकम (गंगा/नर्मदा जलं वा) तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः।

 ........... गोत्र की मेरी माता श्रीमती ....... देवी वसुरूप में तिल तथा पवित्र जल ग्रहण कर तृप्त हों। तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः।

“AmukGotraa Asmnamata AmukiDevi Vasuroopaa Tripyatamidam Tilodakam Tasmey Swadha Namah, Tasmey Swadha Namah, Tasmey Swadha Namah.”

निस्संदेह मन्त्र श्रद्धा अभिव्यक्ति का श्रेष्ठ माध्यम हैं किन्तु भावना, सम्मान तथा अनुभूति अन्यतम हैं। 

 It is true that mantra is a great medium for pray and offerings. But love, attachment, feelings, sentiments, emotions, regards, Bhawana is a prime not mantras.


पितृ विसर्जन दिवस: आश्विन पितृ पक्ष अमावस्या सोमवार 15 अक्टूबर 2012 
Pitra Visarjan day:Ashwin Pitra Paksha Amvasya: Mon, 15 Oct 2012

जलांजलि पूर्व दिशा में 16 बार, उत्तर दिशा में 7 बार तथा दक्षिण दिशा में 14 बार अर्पित करें  offer jalanjali (take tilodikam in both hands joined and leave graduaalee on earth or in some vassel) 16 times in east, 7 times in north & 14 times in south.                                            
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संक्षिप्त पितृ तर्पण विधि:
 पितरोंका तर्पण करनेके पूर्व इस मन्त्र से हाथ जोडकर प्रथम उनका आवाहन करे -
ॐ आगच्छन्तु मे पितर इमं गृह्णन्तु जलान्जलिम ।

अब तिलके साथ तीन-तीन जलान्जलियां दें - (पिता के लिये) अमुकगोत्रः अस्मत्पिता अमुक (नाम) शर्मा वसुरूपस्तृप्यतामिदं तिलोदकं (गंगाजलं वा) तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः । (माता के लिये) अमुकगोत्रा अस्मन्माता अमुकी (नाम) देवी वसुरूपा तृप्यतामिदं तिलोदकं तस्यै स्वधा नमः, तस्यै स्वधा नमः, तस्यै स्वधा नमः । जलांजलि पूर्व दिशा में 16 बार, उत्तर दिशा में 7 बार तथा दक्षिण दिशा में 14 बार अर्पित करें  offer jalanjali (take tilodikam in both hands joined and leave graduaalee on earth or in some vassel) 16 times in east, 7 times in north & 14 times in south.
''ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्''

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