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शुक्रवार, 20 सितंबर 2013

muktak salila: sanjiv

मुक्तक सलिला:
संजीव
*
प्रभु ने हम पर किया भरोसा, दिया दर्द अनुपम उपहार
धैर्य सहित कर कद्र, न विचलित हों हम, सादर कर स्वीकार
जितनी पीड़ा में खिलता है, जीवन कमल सुरभि पाता-
'सलिल' गौरवान्वित होता है, अन्यों का सुख विहँस निहार 

salil.sanjiv@gmail.com / divyanarmada.blogspot.in

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