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बुधवार, 19 दिसंबर 2012

ग़ज़ल धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’

ग़ज़ल
धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
*
बरगदों से जियादा घना कौन है?
किंतु इनके तले उग सका कौन है?

मीन का तड़फड़ाना सभी देखते
झील का काँपना देखता कौन है?

घर के बदले मिले खूबसूरत मकाँ
छोड़ता फिर जहाँ में भला कौन है?

लाख हारा हूँ तब दिल की बेगम मिली
आओ देखूँ के अब हारता कौन है?

प्रश्न इतना हसीं हो अगर सामने
तो फिर उत्तर में नो कर सका कौन है?
***

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