स्तम्भ menu

Drop Down MenusCSS Drop Down MenuPure CSS Dropdown Menu

शनिवार, 1 दिसंबर 2012

मुक्तिका: तकदीर बनाना ही होगा संजीव 'सलिल'

मुक्तिका:
तकदीर बनाना ही होगा
संजीव 'सलिल'
*
जो नाहासिल है उसको अब तकदीर बनाना ही होगा.
रेगिस्तां में उम्मीदों का फिर बाग़ लगाना ही होगा..

हों दाँत न बाकी तो क्या है? हसरत-अरमान न खत्म हुए.
हर सुबह फलक पर ख्वाब नए हँसकर दिखलाना ही होगा..

ज्यों की त्यों चादर है अपनी, रूखी-सूखी की फ़िक्र नहीं.
ढाई आखर की परिपाटी, पायी- दे जाना ही होगा..

पत्थर ने ठोकर दी, गुल ने काँटों से अगर नवाज़ा तो-
कर अदा शुक्रिया हँसकर चोटों को शर्माना ही होगा..

उपहास करे या मातम जग, तुझको क्या? तू मुस्काता रह-
जो साथ 'सलिल' का दे दिलवर दिल का अफसाना ही होगा..

***

2 टिप्‍पणियां:

Indira Pratap द्वारा yahoogroups.com ने कहा…

Indira Pratap द्वारा yahoogroups.com


क्या बात है संजीव भाई ,
एक से एक बढ़ कर प्रस्तुतियाँ|
दाद क़ुबूल करें दिद्दा

sanjiv 'salil' ने कहा…

दिद्दा आपकी संगत का कुछ तो असर होगा ही। धन्यवाद