गिरिजा कर सोलह सिंगार
स्व. शांति देवी वर्मा
*
गिरिजा कर सोलह सिंगार,
चलीं शिव शंकर ह्रदय लुभांय.....
*
माँग में सेंदुर; भाल पे बिंदी, नैनन कजरा सजाय।
गिरिजा कर सोलह सिंगार,
चलीं शिव शंकर ह्रदय लुभांय.....
*
बेनी गूँथी मुतियन के संग; चंपा-चमेली महकाय।
गिरिजा कर सोलह सिंगार,
चलीं शिव शंकर ह्रदय लुभांय.....
*
बांह बाजूबंद हाथ में कंगन, नौलखा कंठ सुहाय।
गिरिजा कर सोलह सिंगार,
चलीं शिव शंकर ह्रदय लुभांय.....
*
कानन झुमका; नाक नथनिया, बेसर हीरा भाय।
गिरिजा कर सोलह सिंगार,
चलीं शिव शंकर ह्रदय लुभांय.....
*
कटि करधनिया; पाँव पैजनिया, घुँघुरु रतन जड़ाय।
गिरिजा कर सोलह सिंगार,
चलीं शिव शंकर ह्रदय लुभांय.....
*
बिछिया में मणि; मुंदरी नीलम, चलीं ठुमुक बल खाँय।
गिरिजा कर सोलह सिंगार,
चलीं शिव शंकर ह्रदय लुभांय.....
*
लहँगा लाल; चुनरिया नीली गोटा-जरी लगाय।
गिरिजा कर सोलह सिंगार,चलीं शिव शंकर ह्रदय लुभांय.....
*
ओढ़ चदरिया सात रंग की, शोभा बरनि न जाय।
गिरिजा कर सोलह सिंगार,
चलीं शिव शंकर ह्रदय लुभांय.....
*
चलीं शिव शंकर ह्रदय लुभांय.....
*
गजगामिन हौले पग धरतीं, मन ही मन मुस्कांय।
गिरिजा कर सोलह सिंगार,चलीं शिव शंकर ह्रदय लुभांय.....
*
नत नयनों; बंकिम सैनों से, अनकहनी कँह जांय।
गिरिजा कर सोलह सिंगार,चलीं शिव शंकर ह्रदय लुभांय.....
*
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें