शनिवार, 13 मई 2017

jabalpur ki sair

जबलपुर में शुभ प्रभात 
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रेवा जल में चमकतीं, रवि-किरणें हँस प्रात।
कहतीं गौरीघाट से, शुभ हो तुम्हें प्रभात।।१।।
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सिद्धघाट पर तप करें, ध्यान लगाकर संत।
शुभप्रभात कर सूर्य ने, कहा साधना-तंत।।२।।
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खारी घाट करा रहा, भवसागर से पार। 
सुप्रभात परमात्म से, आत्मा कहे पुकार।।३।
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साबुन बिना नहाइए, करें नर्मदा साफ़। 
कचरा करना पाप है, मैया करें न माफ़।।४।।
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मिलें लम्हेटा घाट में, अनगिन शिला-प्रकार।
देख, समझ पढ़िये विगत, आ आगत के द्वार।।५।।
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है तिलवारा घाट पर, एक्वाडक्ट निहार।
नदी-पाट चीरे नहर, सेतु कराए पार।।६। 
शंकर उमा गणेश सँग, पवनपुत्र हनुमान।
देख न झुकना भूलना, हाथ जोड़ मति मान।।७।। 
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पोहा-गरम जलेबियाँ, दूध मलाईदार।
सुप्रभात कह खाइए, कवि हो साझीदार।।८।।
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धुआँधार-सौन्दर्य को, देखें भाव-विभोर। 
सावधान रहिए सतत, फिसल कटे भव-डोर।।९।।
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गौरीशंकर पूजिए, चौंसठ योगिन सँग।
भोग-योग संयोग ने, कभी बिखेरे रंग।।१०।।
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नौकायन कर देखिये, संगमरमरी रूप
शिखर भुज भरे नदी को, है सौन्दर्य अनूप।११।। 
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बहुरंगी चट्टान में, हैं अगणित आकार।
भूलभुलैयाँ भुला दे, कहाँ गई जलधार?।१२।।
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बंदरकूदनी देख हो, लघुता की अनुभूति।
जब गहराई हो अधिक, करिए शांति प्रतीति।।१३।।
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कमल, मगर, गज, शेर भी, नहीं रहे अब शेष।
ध्वंस कर रहा है मनुज, सचमुच शोक अशेष।।१४।।
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मदनमहल अवलोकिए, गा बम्बुलिया आप।
थके? करें विश्राम चल, सुख जाए मन-व्याप।।१५।।
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