मंगलवार, 30 मई 2017

पहली बार बुन्देली पर प्रयास..
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मनाये सें एकउ ने मानी।
जे बउआ कैसी रिसानी।
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वे उठ भुंसारे से ऐसी अकड़ गईं।
मूँजा की खटिया की पाटी पकर लई।
बउआ पे चढ़ गयीं भुमानी।
जे बउआ कैसी रिसानी।
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कीने संदुकिया की कूची झटक लई।
कै तोये धकिया कें मोड़न पटक दई।
कि कोनउँ ने चुटैया तानी?
जे बउआ कैसी रिसानी।
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बर जावें सबरे तोरे अटा अटारीं।
मोड़ी-मोड़न खों वे दे राई गारीं।
बब्बा खों कोसें पी पानी।
जे बउआ कैसी रिसानी।
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मनाये सें एकउ ने मानी।
जे बउआ कैसी रिसानी।
  *हरिवल्लभ शर्मा
  दि. 30.05.2017

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