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मंगलवार, 21 मार्च 2017

haiku geet

हाइकु गीत * आया वसंत इन्द्रधनुषी हुए दिशा-दिगंत.. शोभा अनंत हुए मोहित, सुर-मानव संत.. * प्रीत के गीत गुनगुनाती धूप बनालो मीत. जलाते दिए एक-दूजे के लिए कामिनी-कंत.. * पीताभी पर्ण संभावित जननी जैसे विवर्ण.. हो हरियाली मिलेगी खुशहाली होगे श्रीमंत.. * चूमता कली मधुकर गुंजार लजाती लली.. सूरज हुआ उषा पर निसार लाली अनंत.. * प्रीत की रीत जानकर न जाने नीत-अनीत. क्यों कन्यादान? 'सलिल' वरदान दें एकदंत.. ***

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