बुधवार, 29 मार्च 2017

sawaiyaa

अरसात सवैया ( वार्णिक छंद )-7भानस,1राजभा 211 211 211 211 211 211 211 212 ( 2 लघु को गुरू मानना वर्जित ) पाँव पड़ूं कर जोर मनावत मातु उमा भव-सागर तारिणी दीपक धूप कपूर जलावत आरति गावत दुःख निवारिणी धीरज कौन विधी धरुं मात विचार करो मम काज सवारिणी मातु हरो मम आपद भीषण दीन दुखी जन को भय हारिणी लतायादव

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