बुधवार, 18 जनवरी 2017

laghukatha

लघुकथा-
निर्दोष
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उसने मनोरंजन के लिए अपने साथियों सहित जंगल में विचरण कर रहे पशुओं का वध कर दिया.
उसने मदहोशी में सडक के किनारे सोते हुए मनुष्यों को कार से कुचल डाला.
पुलिस-प्रशासन के कान पर जून नहीं रेंगी. जन सामान्य के आंदोलित होने और अखबारबाजी होने पर ऐसी धाराओं में वाद स्थापित किया गया कि जमानत मिल सके.
अति कर्तव्यनिष्ठ न्यायालय ने अतिरिक्त समय तक सुनवाई कर तत्क्षण फैसला दिया और जमानत के निर्णय की प्रति उपलब्ध कराकर खुद को धन्य किया.
बरसों बाद सुनवाई आरम्भ हुई तो एक-एक कर गवाह मरने या पलटने लगे.
दिवंगतों के परिवार चीख-चीख कर कहते रहे कि गवाहों को बचाया जाए पर कुछ न हुआ.
अंतत:, पुलिस द्वारा लगाये गए आरोप सिद्ध न हो पाने का कारण बताते हुए न्यायालय ने उसे घोषित कर दिया निर्दोष.
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