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मंगलवार, 11 जून 2013

shubh kamna : ऋचा-अनुज परिणय, मंगलवार ११ जून २०१३


श्री गणेशाय नमः
ऋचा-अनुज परिणय, मंगलवार ११ जून २०१३
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रिद्धि-सिद्धि माँ हों सदय, हों प्रसन्न गणनाथ
ऋचा सुनाएँ 'ऋचा' सुन, रख दें सर पर हाथ
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रीति सनातन-पुरातन, प्रकृति-पुरुष हों संग
मिटा दूरियाँ मन मिला, दें जीवन को रंग
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नेह नर्मदा में नहा, 'अनुज' पधारे द्वार
अंजु-वंदना पुलककर, करें अतिथि मनुहार
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विजय-अनिल भुज भेंटकर, जोड़ रहे सम्बन्ध
जबलपूर-भोपाल हँस, करें नवल अनुबंध
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हुलस कन्हैया, पुलक दें- रविशंकर आशीष
कहें सुशीला त्रिवेणी, भला करें जगदीश
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माया है गोविन्द की, गूंजे वैदिक मन्त्र
प्रेमनगर-गुप्तेश्वर, रचें प्रणय का तंत्र
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आशा-आकांक्षा हुई, पूर्ण- मिली मृदु छाँव
ऋचा राजराजेश्वरी, चली पिया के गाँव
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सजा कल्पना अल्पना, करे हथेली लाल
मेंहदी रचना सुर्ख तू, करतल हो करताल
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अनिल अनल भू नभ 'सलिल', पंचतत्वमय देह
द्वैत मिटा अद्वैत वर, हों मन-प्राण विदेह
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दीपक-रश्मि हरे तिमिर, श्रृद्धा करे निशांत
प्रांजल पूजा सुहानी, हों प्रसन्न दिग्कांत
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ओशी शुभि नित्य विहँस, गायें बन्नी गीत
ऋतु समृद्धि उपहार ले, मुदित बढ़ाए प्रीत
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खुश अनिकेत अरुण वरुण, नभ नीलाभ विभोर
आनंदित अनिमेष मन, खुशयां रहा अंजोर
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चुटकी भर सिन्दूर दे, सात जन्म का साथ
ढाई आखर पढ़ युगल, रखे उठाकर माथ
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घूँघट पर अचकन गयी, पल भर में दिल हार
कलगी पर बेंदा करे, तन-मन विहँस निसार
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श्वास-आस, मन-प्राण हों, सुख-समृद्धि भरपूर
छेड़े सरगम सुखों की, साँसों का संतूर
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शब्द्सुमन: संजीव, ९४२५१ ८३२४४
divyanarmada.blogspot.com
salil.sanjiv@gmail.com

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