शनिवार, 1 जून 2013

chhayavaad (romanticism):

 हिंदी कविता का आकर्षण छायावाद Romanticism :

दीप्ति गुप्ता - संजीव 'सलिल'

*

जब मानवीय प्रवृत्तियों व कार्य-कलापों को प्रकृति के उपादानों के माध्यम से व्यक्त करनेवाली कविता छायावादी कविता है। प्रकृति पर मानवीय भावों का आरोपण छायावादी कविता होती है! छायावाद के चार प्रमुख स्तम्भ जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', महादेवी वर्मा तथा सुमित्रानन्दन पन्त हैं।  http://voutsadakis.com/GALLERY/ALMANAC/Year2011/Jan2011/01302011/jayashankar-prasad-3.jpghttp://lekhakmanch.com/wp-content/uploads/2012/01/suryakant-tripathi-nirala.jpghttp://upload.wikimedia.org/wikipedia/en/b/be/Sumitranandan_Pant,_(1900_-_1977).jpg
 
Kaamaayani - Nirved by Jaishankar Prasad     
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सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

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महादेवी वर्मा
        
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सुमित्रानंदन पन्त
  http://i234.photobucket.com/albums/ee147/MPMEHTA/poem.jpg  
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अंग्रेजी काव्य में छायावाद को रोमांटिसिज्म कहा गया है। 
Nature and love were a major themes of Romanticism favoured by 18th and 19th century poets such as Lord Byron, Percy Bysshe Shelley and John Keats. Emphasis in such poetry is placed on the personal experiences of the individual.
 
The Question
by
Percy Bysshe Shelley
I dreamed that, as I wandered by the way,
Bare Winter suddenly was changed to Spring,
And gentle odours led my steps astray,
Mixed with a sound of waters murmuring
प्रश्न: पर्सी ब्येश शैली
भटक रहा था पथ पर मैंने सपना देखा
कड़ी शीत को बासंती होते था लेखा
सलिल-धार की कलकल
मिश्रित मदिर सुरभि ने
मेरे कदमों को यायावर
कर बहकाया

7 टिप्‍पणियां:

indira pratap ने कहा…

Indira Pratap via yahoogroups.com

प्रिय दीप्ति , छायावाद के चार मुख्य स्तम्भ में से महीयसी महादेवी जी की चार पंक्तियाँ मैं भी उद्धृत करना चाहूँगी |
"मैं नीर भरी दुःख की बदली ,
विस्तृत नभ का कोई कोना ,
मेरा कभी न अपना होना ,
परिचय इतना इतिहास यही ,
उमड़ी कल थी, मिट आज चली| दिद्दा

deepti gupta ने कहा…

आदरणीया दिद्दा ,

छायावादी कविता के महादेवी जी के अन्य उदहारण- जैसे, प्रकृति पर नायिका का आरोप-

१) पुलकती आ बसंत रजनी
तारकमय नव वेणी बंधन
शीश फूलकर शशि का नूतन
मुक्ताहल अविराम बिछा दे
चितवन से अपनी! 'नीरजा'- महादेवी वर्मा)

२) रजनी ओढ़े जाती थी
झिलमिल तारों कि जाली
उसके बिखरे वैभव पर जब
जब रोती थी उजियारी! 'नीहार-यामा' - महादेवी वर्मा )

deepti gupta ने कहा…





संध्या पर 'रूपसी' का आरोप -
कहो रूपसी तुम कौन .....?
व्योम से उतर रहीं चुपचाप..? ('संध्या' - पन्त)

अरुणिमा 'भोर' में प्रेयसी के दर्शन -
प्राची के अरुण मुकुर में सुन्दर प्रतिबिम्ब तुम्हारा
उस अलस उषा में देखूं, अपनी आँखों का तारा (प्रसाद)

P.B.Shelley की यह कविता Romanticism का सुन्दर उदहारण है -

Swiftly walk over the western wave spirit of Night
Wrap thy form in a mantle grey star in wrought,
Blind with thine hair, the eyes of the Day.....!

(' To The Night ' - Shelley)

indira pratap ने कहा…

Indira Pratap via yahoogroups.com

दीप्ति,
अति उत्तम उदाहरण, क्या बात थी छायावाद की, मनोरम, मनमोहन|खोजो, खोजो| निराला जी , पंतजी, महादेवीजी, प्रसाद जी सब जीवंत हो उठेगे एक साथ||
दिद्दा

kanu vankoti ने कहा…

Kanu Vankoti

इंदिरा जी और दीप्ति जी आपने छायावादी कविता के बहुत प्यारे उदहारण दिए . अंग्रेजी कवि शैली का भी दे दिया, वाह . मज़ा आ गया पढ़ कर

नमन !

कनु

sanjiv ने कहा…

दिद्दा जी -दीप्ति जी
पूज्य बुआ श्री का स्मरण मन भीगा गया। आपका आभारी हूँ। प्रसाद-निराला-महादेवी और पन्त के चार स्तंभों पर छायावाद का भव्य प्रासाद बना और आब तक शान से खड़ा है। एक रचना अलग लगा रहा ह

sanjiv ने कहा…

कनु जी
इस अनुष्ठान की सराहना हेतु धन्यवाद.
इसे अधिक समृद्ध-सफल बनाने हेतु अन्य कवियों बच्चन, सुमन, दिनकर, नवीन आदि की रचनाओं के उद्धरण, इस मंच पर सक्रिय साथियों की रचनाएँ, हिंदीतर भाषाओँ के कवियों के उद्धरण छ्यावाद के लक्षण-विशेषताओं आदि हेतु सभी से अनुरोध है.
प्रसाद, निराला, महादेवी, पन्त की एक-एक रचना चित्रों के साथ, छायावाद से जुडी अपनी सद्यरचित रचना, शेली के उद्धरण का काव्यानुवाद अलग से पोस्ट है.