शनिवार, 15 जून 2013

doha salila hindi salil

दोहा सलिला
हिंदी नगपति हिमालय
संजीव
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हिंदी नगपति हिमालय, बन छूती आकाश
हो नदीश नित तोड़ती, सीमाओं के पाश
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हिंदी में रजनीश ने, दिया अनूठा ज्ञान
मिला महर्षि महेश से, दिव्य वेद विज्ञान
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हिंदी ने युग-युग किया, वाणी का श्रृंगार
राष्ट्र अस्मिता बचने, दहकी बन अंगार
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हिंदी है जनतंत्र के जन-जन की आवाज़
कोटि-कोटि कंठों बसी, करे ह्रदय पर राज
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हिंदी दिल से दिल मिला, मिटा रही तकरार
हाथ मिला, पग साथ  धर, बांटो-पाओ प्यार
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