शनिवार, 13 जुलाई 2019

कुंडलिया

इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ खुदा! कौन-कौन इस चित्र पर अपनी कलम चलाएगा? गद्य या पद्य की किसिस भी विधा में लिखें-
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चित्र पर रचना:
छंद:  कुंडलिया
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विधान: एक दोहा + एक रोला
अ. २ x १३-११, ४ x ११-१३ = ६ पंक्तियाँ
आ. दोहा का आरंभिक शब्द या शब्द समूह रोला का अंतिम शब्द या शब्द समूह
इ. दोहा का अंतिम चरण, रोला का प्रथम चरण
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परदे में छिप कर रहे, हम तेरा दीदार।
परदा ऐसा अनूठा, तू भी सके निहार।।
तू भी सके निहार, आह भर, देख हम हँसे।
हँसे न लेकिन फँसे, ह्रदय में शूल सम धँसे।।
मुझ पर मर, भर आह, न कहना कर में कर दे।
होजा तू संजीव, हटाकर आजा परदे।।
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१४-७-२०१७
salil.sanjiv@gmail.com
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