सोमवार, 1 जुलाई 2019

पुरूषोत्तम दास टंडन

राजर्षि टंडन के प्रति काव्यांजलि
गजेंद्र सिंह सोलंकी
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संबंधित इमेजभारत के रतन त्याग तप मूरत वह, यशस्वी जीवनी जिलाकर चले गये।
दृढ़व्रती पुरुषोत्तम राजर्षि टंडन जी, निति और मर्यादा हिट काया को कसे गये।
हिंदी के प्राण संस्कृति की धरोहर महा, स्वातंत्र्य समर में कण-कण घिसे गये।
हिंदी की गाथा का पर्याय बना जीवन तप, भारत की गाथा नखत बन जड़े गये।
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सृष्टि का नियम सच है सबको ही जाना है, किंतु कुछ गये ऐसे गये भी नहीं गये।
मौत कब मार सकी देह भले ले गयी वो, कृत्यों की कीर्ति तो किरीट पर जड़े गये।
रे पावन संस्कृति के पुनीत प्रवाह में काया का अर्ध्य चढ़ा नाता पथ गढ़े गये।
हैं कर गये प्रशस्त मानवी प्रशस्तियाँ वो अपनी प्रशस्तियाँ हेय मान छडे गये।
(छंदसि त्रिविधा)
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