शनिवार, 13 जुलाई 2019

लेख नशा: कारण और निवारण

विशेष लेख
नशा: कारण और निवारण
आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
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नशा क्या है-
किसी सामान्य मनुष्य की मानसिक स्थिति को बदलकर नींद या मदहोशी की हालत में ला देने वाले पदार्थ नारकॉटिक्स, ड्रग्स या नशा कहलाते है। मॉर्फिन, कोडेन, मेथाडोन, फेंटाइनाइल आदि नारकॉटिक्स चूर्ण (पाउडर), गोली (टैब्लेट) और सुई (इंजेक्शन) के रूप में मिलते हैं। ये मस्तिष्क और आसपास के ऊतकों (टिशू) को उत्तेजित करते हैं। किसी मरीज को दर्द से राहत दिलाने के लिए कभी-कभी चिकित्सक अल्प मात्रा में इनका उपयोग करते हैं। केवल मौज-मजे के लिए पारंपरिक नशे (ज़र्दा, बीड़ी, सिगरेट, चिलम, गाँजा, भाँग, चरस, गांजा, अफीम, छिपकली की पूँछ, शराब आदि), सिंथेटिक ड्रग्स (स्मैक, हीरोइन, आईस आदि), ब्राउन शुगर, सल्फ़ी, मेडिकल नशा (मोमोटिल, कैरीसोमा, आयोडेक्स, कफ सिरप आदि), स्निफर्स (लिक्विड व्हाइट फ्लूड, पेट्रोल सूँघना, पंक्चर सेल्यूशन को सूँघना आदि) आदि का बार-बार उपयोग करना लत बनकर बेचैनी, पागलपन या मौत का कारण हो सकता है।
। जो पदार्थ मदहोश कर, हर लेते हैं शक्ति।
।। उनका सेवन मत करें, रखिए सदा विरक्ति।।
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। बुद्धि-विवेक हरे नशा, ताकत लेता छीन।
।। पात्र हँसी का बनाता, मानव होता दीन।।
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नशा करने का दुष्प्रभाव-
नशा करने के बाद आँखें लाल होना, जबान तुतलाना, पसीना आना, अकारण गुस्सा आना या ख़ुशी होना, पैर लड़खड़ाना, शरीर टूटना, नींद-भूख कम होना, बेमतलब की बातें करना, घबराहट होना, उबासी आना, दस्त लगना, दौरे पड़ना आदि दुष्प्रभाव दिखते हैं।
। लाल आँख टूटे बदन, आता गुस्सा खूब।
।। बेमतलब बातें करें, मनुज नशे में डूब।।
नशा करनेवाले की पहचान-
पैसों की बढ़ती माँग, पुराने दोस्त छोड़ कर नये दोस्त बनाना, अकेला रहने की कोशिश करना, घर में नई किस्म की दवाएं या खाली इंजेक्शन मिलना आदि से नशे की आदत का अनुमान लगाया जा सकता है।
। धन चाहे, क्रोधित रहे, घबराए धन चाह।
।। काली ऊँगली बताते, करता नशा तबाह।।
नशा करने का कारण-
नशीला पदार्थ खून में जाते ही आदमी को खुशी और स्फूर्ति की अनुभूति कराता है। प्राय: लोग अन्य नशैलची की संगत में आकर दबाव या शौकवश नशा करने लगते हैं। मानसिक तनाव, अपमान, अभाव, प्रताड़ना, सजा, उपहास, द्वेष, बदला आदि स्थितियाँ नशा करने का कारण बन जाती हैं। नशे की प्रवृत्ति बढ़ने का मुख्य कारण नशीले पदार्थ का सुलभता से मिल जाना है।
। द्वेष, हानि, अपमान, दुःख, शौक नशे के मूल।
।।गन्दी संगत लत लगा, कर दे सोना धूल।।
नशा करने में महिलायें पीछे नहीं-
पहले सामान्यत: पुरुष ही नशा करते थे किन्तु अब लड़कियाँ और महिलाएँ भी पीछे नहीं हैं। पढ़ाई, नौकरी और उससे उपजे तनाव, खुद को आधुनिक दिखाने या बुरी संगत के कारण नशा करती महिला आसानी से दैहिक शोषण का शिकार बन जाती है। महिला का शरीर पुरुष के शरीर की तुलना में कोमल होता है। इसलिए नशा उसे अधिक हानि पहुँचाता है। महिला के नशा गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क तथा शरीर के विकास पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। भारत में महिलाएँ परिवार की मान-प्रतिष्ठा की प्रतीक मानी जाती हैं। महिला के नशा करने से परिवार की प्रतिष्ठा पर आघात पहुँचता है तथा बच्चे आसानी से नशे के आदी हो जाते हैं। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसन में छपे शोध के अनुसार धूम्रपान के कारण पुरुषों की ही तरह महिलाएं भी बड़ी संख्या में मर रही हैं। सिगरेट का अधिक सेवन करने से वर्ष २००० से २०१० के बीच धूम्रपान करने वाली महिलाओं में फेफड़े के कैंसर से मौत की आशंका सामान्य लोगों की तुलना २५ गुना अधिक हो गई। शोध २० लाख से अधिक अमरीकी महिलाओं से एकत्र जानकारी पर आधारित है।
। नशा शत्रु है नारियाँ, रहें हमेशा दूर।
।। काया घर परिवार की, रक्षा तभी हुजूर।।
नशा नाश का दूत-
नशा किसी भी प्रकार का हो, एक सामाजिक अभिशाप है। नशा करना और कराना अपराध है। कभी भी किसी भी कारण से धूम्रपान, सुरापान अथवा अन्य नशा न करें। नशा आरम्भ करने के बाद उसकी लत बढ़ती ही जाती है जिसे छोड़ना असम्भव न भी हो किन्तु बहुत कथन तो होता ही है। इसलिए बेहतर यही है कि नशा किया ही न जाए। नशा एक ऐसी बुराई है, जिससे इंसान समय से पहले ही मौत का शिकार हो जाता है । जहरीले नशीले पदार्थों के सेवन से व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक हानि पहुँचने के साथ ही सामाजिक वातावरण प्रदूषित होता है। अपनी और परिवार की सामाजिक तथा आर्थिक स्थिति को भारी नुकसान होता है । नशैलची व्यक्ति समाज में हेय की दृष्टि से देखा जाता है। वह परिवार के लिए बोझ हो जाता है। समाज एवं राष्ट्र के लिये उसकी उपादेयता शून्य हो जाती है । वह नशे से अपराध की ओर अग्रसर होकर शांतिपूर्ण समाज के लिए अभिशाप बन जाता है ।
आजकल बच्चे, किशोर, युवा, प्रौढ़, वयस्क वृद्ध सभी नशे की चपेट में हैं । इस अभिशाप से समय रहते मुक्ति पा लेने में ही मानव समाज की भलाई है । मादक प्रदार्थों के सेवन का प्रचलन किसी भी स्थिति में किसी भी सभ्य समाज के लिए वर्जनीय होना चाहिए। धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का कारण है। यह चेतावनी सभी तम्बाकू उत्पादों पर अनिवार्य रूप से लिखी होने और सभी को पता होने पर भी लोग इसका सेवन बहुत चाव से करते हैं । समाज में पनप रहे अपराधों का एक कारण नशा भी है। नशाखोरी में वृध्दि के साथ-साथ अपराधियों की संख्या में भी वृध्दि होती है। ध्रूमपान से निकट के व्यक्ति को फेफड़ों में कैंसर और अन्य रोग हो सकते हैं। इसलिए न खुद धूम्रपान करें, न ही किसी को करने दें । कोकीन, चरस, अफीम जैसे उत्तेजक पदार्थों के प्रभाव में व्यक्ति अपराध कर बैठता है । इनके अधिक सेवन से व्यक्ति पागल या विक्षिप्त हो जाता है। तंबाखू के सेवन से तपेदिक, निमोनिया और सांस की बीमारियों सहित मुख, फेफड़े और गुर्दे में कैंसर, हृदय रोग और उच्च रक्तचाप हो जाता है।
शराब के सेवन से किडनी और लीवर खराब होते हैं, मुख में छाले पड़ सकते हैं या पेट का कैंसर हो सकता है । इससे अल्सर होता है, गले और पेट को जोड़ने वाली नली में सूजन आ जाती है और बाद में कैंसर भी हो सकता है । गांजा -भांग आदि पदार्थ मनुष्य के मस्तिष्क पर बुरा असर डालते हैं । देश का विकास उसके नागरिकों के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है, लेकिन नशे की बुराई के कारण यदि मानव स्वास्थ्य खराब होगा तो देश का भी विकास नहीं हो सकता । नशा व्यक्ति को तन-मन-धन से खोखला कर देता है। इस बुराई को समाप्त करने के लिए शासन के साथ ही समाज के हर तबके को आगे आना होगा।
। नशा नाश का दूत है, असमय लाता मौत।
।। हँसी-ख़ुशी-सुख छीन ले, लत श्वासों की सौत।।
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। धूम्रपान से फेफड़े, होते हैं कमजोर।
।। कैंसर अतिशय कष्ट दे, काटे जीवन-डोर।।
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। किडनी-लीवर का करे, सुरा-पान नुकसान।
।। तंबाकू-ज़र्दा नहीं, खाते हैं मतिमान।।
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। स्मैक, चरस, कोकीन हैं, यम जैसे विकराल।
।। सेवन कर मत जाइये, आप काल के गाल।।
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नशा रोकने के उपाय-
शासन - प्रशासन मादक पदार्थों पर रोक लगाकर नशे से हो रही हानि को घटा सकता है। आजकल सरकारें दोमुँही नीति अपना रही हैं। एक ओर मद्यपान को समाप्त करना चाहती हैं, दूसरी ओर शराब की दुकानें नीलाम करती हैं। िासि तरह बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू के उत्पादों का उत्पादन बंद नहीं कर उन पर चेतावनी चाप कर अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ लेती हैं। यह ठीक है कि मादक पदार्थों का उत्पादन और प्रयोग पूरी तरह से बंद कर देने से राजस्व का घाटा होगा किन्तु कोेे भी धनराशि मानव जीवन से अधिक मूल्यवान नहीं हो सकती। राजस्व का यह घाटा बीमारियों के कम होने से चिकित्सा, औषधि, शल्यक्रिया आदि पर संभावित व्यय में कमी तथा अन्य उपायों से पूरी की जा सकती है।
नशे की आदत लगने पर दृढ़ संकल्प, प्यार और अपने पण से छुड़ाई जा सकती है। नशैलची से घृणा कर दूर भागने के स्थान पर उसने अपनापन रखकर मित्र की तरह व्यवहार करें। उसे नशे से हानि के बारे में जानकारी दें। पढ़ाई या अन्य गृह कार्य का अत्यधिक बोझ न डालें। उसकी संगत का ध्यान रखें कि नशा करनेवाला अन्य साथी न मिल सके। उसे हल्के-फुल्के मन बहलाव के कार्य में व्यस्त रखें। नशा न करने के कारण हो रहे कष्ट को सहन करने और भूलने में उसकी सहायता करें। कई संस्थाएं भी इस दिशा में कार्य कर रही हैं। बहुधा व्यक्ति कुछ समय के लिए नशा छोड़ने के बाद फिर नशा करने लगता है। इसका एकमात्र उपाय दृढ़ संकल्प है।
प्रबंधों के बावजूद चोरी-छिपे मादक पदार्थों का क्रय-विक्रय करने वालों के विरुद्ध कड़े कदम उठाकर उनकी गिरफ्तारियाँ कर दण्ड दिया जा सके तो जा सके तो नशे की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा।
नशे की लत घटाने और मिटाने का एक प्रभावी उपाय ग्राम्यांचलों में स्वस्थ्य मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराना है। गाँव-गाँव में योग कक्षाएँ, व्यायाम शालाएँ, अखाड़े, वाचनालय, पुस्तकालय, कला तथा साहित्य की कार्यशालाएँ निरन्तर चलें तो आम जन निरंतर व्यस्त रहेंगे और नशे की प्रवृत्ति पर अंकुश लग सकेगा। ग्राम्य अंचलों की कलाओं को प्रोत्साहन देकर रामलीला, नौटंकी, आल्हा गायन, कजरी गायन, फाग गायन आदि की प्रतियोगिताएँ कर प्रशासन द्वारा पुरस्कृत किया जाए तो इनकी तैयारी में व्यस्त रहने से आम लोगों में नशे की और उन्मुख होने का चाव घटेगा।
। अपनापन संयम ख़ुशी, सरल - सुगम उपचार।
।। व्यस्त रखें खुद को सदा, पायें - बाँटें प्यार।।
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। मादक तत्वों का नहीं, उत्पादन हो और।
।।शासन चेते नीतियाँ, बदले ला नव दौर।।
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। अब न दुकानें मद्य की, खुलें, खुली हों बंद।
।।नीति आबकारी बदल, विहँस मिटायें गंद।।
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।गाँजा भाँग अफीम का, जो करते व्यापार।
।। कड़ा दण्ड उनको मिले, जनगण करे पुकार।।
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।पहले बीमारी बढ़ा, फिर करना उपचार।
।।जनहितकारी राज्य में, क्यों शासन लाचार।।
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।आय घटे राजस्व की, खोजें अन्य उपाय।
।।सुरा बेच मत कीजिए, जनता को लाचार।।
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।ग्राम्य कला-साहित्य की, कक्षाएँ हों रोज।
।।योग और व्यायाम की, प्रतिभाएँ लें खोज।।
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।कजरी आल्हा फाग का, गायन हो हर शाम।
।।नौटंकी मंचन करें, कोेेई न हो बेकाम।।
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नशा मुक्ति संदेश
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नशा दूत है मौत का
नाम साँस की सौत का।
छोड़, मिले जीवन नया
जो न तजे मरघट गया।
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सुरा तमाखू स्मैक हैं, घातक तज दें आप
सेवन करना-कराना, है सर्वाधिक पाप
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बीड़ी-सिगरेट मौत को, लाते असमय पास
भूले कभी न पीजिए, दूर रहे संत्रास
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नशा नाश-पैगाम है, रहें नशे से दूर
जो नादां करता नशा, आँखे रहते सूर
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