सोमवार, 4 नवंबर 2019

दोही छंद

छंद सलिला ;
दोही
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लक्षण छंद -
चंद्र कला पंद्रह शुभ मान, रचें विषम पद आप।
एक-एक ग्यारह सम जान, लघु पद-अंत सुमाप।।
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उदहारण -
स्नेह सलिल अवगाहन करे, मिट जाए भव ताप।
मदद निबल की जो नित करे, हो जाए प्रभु जाप।।
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संजीव वर्मा 'सलिल'
९४२५१८३२४४

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