बुधवार, 26 मार्च 2014

samayik kavita: kare faisla kaun? -sanjiv

सामयिक रचना :
करे फैसला कौन?
संजीव
*
मन का भाव बुनावट में निखरा कढ़कर है
जो भीतर से जगा,  कौन उससे बढ़कर है?
करे फैसला कौन?, कौन किससे बढ़कर है??
*जगा जगा दुनिया को हारे खुद सोते ही रहे
गीत नर्मदा के गाये पर खुद ही नहीं बहे
अकथ कहानी चाह-आह की किससे कौन कहे
कर्म चदरिया बुने कबीरा गुपचुप बिना तहे
निज नज़रों में हर कोई सबसे चढ़कर है
जो भीतर से जगा,  कौन उससे बढ़कर है?

करे फैसला कौन?, कौन किससे बढ़कर है??
*
निर्माता-निर्देशक भौंचक कितनी पीर सहे
पात्र पटकथा लिख मनमानी अपने हाथ गहे
मण्डी में मंदी, मानक के पल में मूल्य ढहे
सोच रहा निष्पक्ष भाव जो अपनी आग दहे
माटी माटी से माटी आयी गढ़कर है
जो भीतर से जगा,  कौन उससे बढ़कर है?
करे फैसला कौन?, कौन किससे बढ़कर है??
*

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