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शनिवार, 4 मई 2013

hindi geet: acharya sanjiv verma 'salil'

गीत:

मन से मन के तार जोड़ती.....

संजीव 'सलिल'
*

















*
मन से मन के तार जोड़ती कविता की पहुनाई का.
जिसने अवसर पाया वंदन उसकी चिर तरुणाई का.....
*
जहाँ न पहुँचे रवि पहुँचे वह, तम् को पिए उजास बने.
अक्षर-अक्षर, शब्द-शब्द को जोड़, सरस मधुमास बने..
बने ज्येष्ठ फागुन में देवर, अधर-कमल का हास बने.
कभी नवोढ़ा की लज्जा हो, प्रिय की कभी हुलास बने..

होरी, गारी, चैती, सोहर, आल्हा, पंथी, राई का
मन से मन के तार जोड़ती कविता की पहुनाई का.
जिसने अवसर पाया वंदन उसकी चिर तरुणाई का.....
*
सुख में दुःख की, दुःख में सुख की झलक दिखाकर कहती है.
सलिला बारिश शीत ग्रीष्म में कभी न रूकती, बहती है. 
पछुआ-पुरवैया होनी-अनहोनी गुपचुप सहती है.
सिकता ठिठुरे नहीं शीत में, नहीं धूप में दहती है.

हेर रहा है क्यों पथ मानव, हर घटना मन भाई का?
मन से मन के तार जोड़ती कविता की पहुनाई का.
जिसने अवसर पाया वंदन उसकी चिर तरुणाई का.....
*
हर शंका को हरकर शंकर, पियें हलाहल अमर हुए.
विष-अणु पचा विष्णु जीते, जब-जब असुरों से समर हुए.
विधि की निधि है प्रविधि, नाश से निर्माणों की डगर छुए.
चाह रहे क्यों अमृत पाना, कभी न मरना मनुज मुए?

करें मौत का अब अभिनन्दन, सँग जन्म के आई का.
मन से मन के तार जोड़ती कविता की पहुनाई का.
जिसने अवसर पाया वंदन उसकी चिर तरुणाई का.....
**********************
दिव्यनर्मदा.ब्लागस्पाट.कॉम

6 टिप्‍पणियां:

vijay3@comcast.n ने कहा…

vijay3@comcast.net via yahoogroups.com

बहुत सुन्दर माधुर्यपूर्ण रचना लिखी है। बधाई।

विजय

deepti gupta ने कहा…

deepti gupta via yahoogroups.com

आदरणीय संजीव जी,
इस सुंदर , अतिसुन्दर गीत के लिए आपको ढेर बधाई !

सादर,
दीप्ति

achal verma ने कहा…

achal verma

छंन्दों में जीवन भर देना
अति उत्तम यह काम सखे
जीवन में अब गीत भर गया
पढ यह मधुर कलाम सखे ॥

\\ आचार्य जी को ढेरों बधाइय़ाँ \\...,अचल

Kusum Vir via yahoogroups.com ने कहा…

Kusum Vir viayahoogroups.com

आदरणीय आचार्य जी,
आपने कमाल का भावपूर्ण सुन्दर गीत लिखा है
वाह ! क्या बात !

"पहुनाई" और "सिकता" का अर्थ कृपया बताइएगा l

सादर,
कुसुम वीर

sanjiv ने कहा…

केसुम जी आपको रचना रुची तो लेखन कर्म सार्थक हुआ. पाहुन = मेहमान, पहुनाई = मेहमानी

सिकता = बालू या रेत

Kusum Vir via yahoogroups.com ने कहा…

बहुत धन्यवाद आचार्य जी,


कुसुम वीर