बुधवार, 7 अगस्त 2019

राष्ट्रनेत्री सुषमा स्वराज के प्रति भावांजलि

राष्ट्रनेत्री सुषमा स्वराज के प्रति भावांजलि
* शारद सुता विदा हुई, माँ शारद के लोक धरती माँ व्याकुल हुई, चाह न सकती रोक * सुषमा से सुषमा मिली, कमल खिला अनमोल मानवता का पढ़ सकीं, थीं तुम ही भूगोल * हर पीड़ित की मदद कर, रचा नया इतिहास सुषमा नारी शक्ति का, करा सकीं आभास *
पा सुराज लेकर विदा, है स्वराज इतिहास सब स्वराज हित ही जिएँ, निश-दिन किए प्रयास * राजनीति में विमलता, विहँस करी साकार ओजस्वी वक्तव्य से, दे ममता कर वार * वाक् कला पटु ही नहीं, कौशल का पर्याय लिखे कुशलता के कई, कौशलमय अध्याय *
राजनीति को दे दिया, सुषमामय आयाम भुला न सकता देश यह, अमर तुम्हारा नाम * शब्द-शब्द अंगार था, शीतल सलिल-फुहार नवरस का आगार तुम, अरि-हित घातक वार * कर्म-कुशलता के कई, मानक रचे अनन्य सुषमा जी शत-शत नमन, पाकर जनगण धन्य *
शब्दों को संजीव कर, फूँके उनमें प्राण दल-हित से जन-हित सधे, लोकतंत्र संप्राण * महिमामयी महीयसी, जैसा शुचि व्यक्तित्व फिर आओ झट लौटकर, रटने नव भवितव्य * चिर अभिलाषा पूर्ति से, होकर परम प्रसन्न निबल देह तुमने तजी, हम हो गए विपन्न *
युग तुमसे ले प्रेरणा, रखे लक्ष्य पर दृष्टि परमेश्वर फिर-फिर रचे, नव सुषमामय सृष्टि * संजीव ७-८-२०१९

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