शनिवार, 3 अगस्त 2019

मुक्तक

मुक्तक 
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दीपिका दे साथ तो हो अमावस में भी दिवाली।
माहेश्वरी महेश को भज आप होती उमा-काली।।
नित सृजन कर सृष्टि का सज्जित करे, पल-पल सँवारे

जो उसे नत शिर नमन, लौ बार उसके लिए ताली।।

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हो गए हैं धन्य हम तो आपका दीदार कर 
थे अधूरे आपके बिन पूर्ण हैं दिल हार कर 
दे दिया दिल आपको, दिल आपसे है ले लिया
जी गए हैं आप पर खुद को 'सलिल' हम वार कर 

बह्रर 2122-2122-2122-212
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बोलिये भी, मौन रहकर दूर कब शिकवे हुए
तोलिये भी, बात कह-सुन आप-मैं अपने हुए
मैं सही हूँ, तू गलत है, यह नज़रिया ही गलत
जो दिलों को जोड़ दें, वो ही सही नपने हुए

बह्रर 2122-2122-2122-212
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salil.sanjiv@gmail.com

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