शुक्रवार, 13 जून 2014

chhand salila: vidya chhand -sanjiv

छंद सलिला:
विद्याRoseछंद 

संजीव
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छंद लक्षण:  जाति यौगिक, प्रति पद २८ मात्रा, 
                   यति १४-१४ , पदांत गुरु गुरु  

लक्षण छंद:

    प्रभु!कौशल-शिक्षा शुभ हो , श्रम-प्रयास हर सुखदा हो
    लघु शुरुआत अंत गुरु हो , विद्या-भुवन सुफलदा हो 
    संकेत: विद्या = १४, भुवन = १४ 

उदाहरण:

१. उठें सवेरे सेज तजें , नमन करें धरती माँ को        
    भ्रमण करें, देवता भजें , नवा शीश श्री-सविता को   
    पियें दूध अध्ययन करे , करें कार्य नित हितकारी    
    'सलिल' समाज देश का हित , करो बनो पर उपकारी   
     
२. करें पड़ोसी मनमानी , उनको सबक सिखाना है 
    अब आतंकी नहीं बचें , मिलकर मार मिटाना है         
    मँहगाई आसमां छुए , भाव भूमि पर लाना है 
    रह न सके रिश्वतखोरी , अनुशासन अपनाना है  

३. सखी! सजती ही रहीं तो , विरह कैसे मिट सकेगा?           
    पत्र पढ़तीं ही रहीं तो , मिलन कैसे साध सकेगा?
    द्वार की कुण्डी खटकती , कह रही सम्भावना है  
     रही यदि कोशिश ठिठकती , ह्रदय कैसे हँस सकेगा?

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(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अनुगीत, अरुण, अवतार, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उड़ियाना, उपमान, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, कुकुभ, कज्जल, कामरूप, कामिनीमोहन, काव्य, कीर्ति, कुण्डल, कुडंली, गीता, गीतिका, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, चंद्रायण, छवि, जग, जाया, तांडव, तोमर, त्रिलोकी, दिक्पाल, दीप, दीपकी, दोधक, दृढ़पद, नित, निधि, निश्चल, प्लवंगम्, प्रतिभा, प्रदोष, प्रभाती, प्रेमा, बाला, भव, भानु, मंजुतिलका, मदनअवतार, मदनाग, मधुभार, मधुमालती, मनहरण घनाक्षरी, मनमोहन, मनोरम, मानव, माली, माया, माला, मोहन, मृदुगति, योग, ऋद्धि, रसामृत, रसाल, राजीव, राधिका, रामा, रूपमाला, रोला, लीला, वस्तुवदनक, वाणी, विद्या, विधाता, विरहणी, विशेषिका, विष्णुपद, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शास्त्र, शिव, शुभगति, शोभन, शुद्धगा, शंकर, सरस, सार, सारस, सिद्धि, सिंहिका, सुखदा, सुगति, सुजान, सुमित्र, संपदा, हरि, हेमंत, हंसगति, हंसी)

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