गुरुवार, 5 जून 2014

chhand salila: shankar chhand -sanjiv



छंद सलिला:   ​​​

शंकर छंद ​

संजीव
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छंद-लक्षण: जाति महाभागवत, प्रति पद - मात्रा २६ मात्रा, यति १६ - १०, पदांत गुरु लघु.

लक्षण छंद:

बम बम भोले जय शिव शंकर , गौरीपति उमेश 
सोलह गुण-दस इन्द्रियपति जय , सदय हों सर्वेश  
गुरु-लघु सबका अंत तुम्हीं में , तुम्हीं सबके नाथ
सुर नर असुर झुकाते प्रभु! तव , पद पद्म में माथ  

उदाहरण:

१. जय-जय भारत भूमि सुपावन , मनुज को वरदान
   तरसें लेने जन्म देव भी , कवि करें गुणगान
   पुरवैया पछुआ मलयज हँस, करें जीवन दान
   हिमगिरि सागर रक्षक अद्भुत , हर छंद रस-खान 

२. पैर जमीं पर जमा आसमां , करों में लें थाम
    कोई निरक्षर रहे न शेष , सब पा सकें नाम  
    ख्वाब पाल जो अँखिया सोये , करे कर साकार
    हर दिल दिल से जुड़े मिटाकर , आपसी तकरार

३.दिल की दुनिया का दौलत से , जोड़ मत संबंध
   आस-प्यास का कभी हास से , हो नहीं अनुबंध
   जो पाया नाकाफी कहकर , और अधिक न जोड़
   तुझसे कम हो जहाँ उसीसे , करें तुलना-होड़
                   
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(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अरुण, अवतार, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उड़ियाना, उपमान, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, कुकुभ, कज्जल, कामिनीमोहन, काव्य, कीर्ति, कुण्डल, कुडंली, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, चंद्रायण, छवि, जग, जाया, तांडव, तोमर, त्रिलोकी, दिक्पाल, दीप, दीपकी, दोधक, दृढ़पद, नित, निधि, निश्चल, प्लवंगम्, प्रतिभा, प्रदोष, प्रभाती, प्रेमा, बाला, भव, भानु, मंजुतिलका, मदनअवतार, मदनाग, मधुभार, मधुमालती, मनहरण घनाक्षरी, मनमोहन, मनोरम, मानव, माली, माया, माला, मोहन, मृदुगति, योग, ऋद्धि, रसामृत, रसाल, राजीव, राधिका, रामा, रूपमाला, रोला, लीला, वस्तुवदनक, वाणी, विरहणी, विशेषिका, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शास्त्र, शिव, शुभगति, शोभन, शंकर, सरस, सार, सारस, सिद्धि, सिंहिका, सुखदा, सुगति, सुजान, सुमित्र, संपदा, हरि, हेमंत, हंसगति, हंसी)

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