रविवार, 18 मई 2014

chhand salila: rasaal / sumitra chhand -sanjiv


छंद सलिला:   ​​​

रसाल / सुमित्र छंद ​

संजीव
*
छंद-लक्षण: जाति अवतारी, प्रति चरण मात्रा २४ मात्रा, यति दस-चौदह, पदारंभ-पदांत लघु-गुरु-लघु.  


लक्षण छंद:
   रसाल चौदह--दस/ यति, रख जगण पद आद्यंत
  बने सुमि/त्र ही स/दा, 'सलिल' बने कवि सुसंत 

उदाहरण: 
१. सुदेश बने देश / ख़ुशी आम को हो अशेष 
   सभी समान हों न / चंद आदमी हों विशेष
   जिन्हें चुना 'सलिल' व/ही देश बनायें महान
   निहाल हो सके स/मय, देश का सुयश बखान  

२. बबूल का शूल न/हीं, मनुज हो सके गुलाब 
    गुनाह छिप सके न/हीं, पुलिस करे बेनकाब
    सियासत न मलिन र/हे, मतदाता दें जवाब

    भला-बुरा कौन-क/हाँ, जीत-हार हो हिसाब  

  ३. सुछंद लय प्रवाह / हो, कथ्य अलंकार भाव
    नये प्रतीक-बिम्ब / से, श्रोता में जगे चाव
    बहे ,रसधार अमि/त, कल्पना मौलिक प्रगाढ़ 
    'सलिल' शब्द ललित र/हें, कालजयी हो प्रभाव                   
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(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अरुण, अवतार, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उड़ियाना, उपमान, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, कुकुभ, कज्जल, कामिनीमोहन, काव्य, कीर्ति, कुण्डल, कुडंली, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, चंद्रायण, छवि, जग, जाया, तांडव, तोमर, त्रिलोकी, दिक्पाल, दीप, दीपकी, दोधक, दृढ़पद, नित, निधि, निश्चल, प्लवंगम्, प्रतिभा, प्रदोष, प्रभाती, प्रेमा, बाला, भव, भानु, मंजुतिलका, मदनअवतार, मधुभार, मधुमालती, मनहरण घनाक्षरी, मनमोहन, मनोरम, मानव, माली, माया, माला, मोहन, मृदुगति, योग, ऋद्धि, रसामृत, रसाल, राजीव, राधिका, रामा, लीला, वस्तुवदनक, वाणी, विरहणी, विशेषिका, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शास्त्र, शिव, शुभगति, सरस, सार, सारस, सिद्धि, सुखदा, सुगति, सुजान, सुमित्र, संपदा, हरि, हेमंत, हंसगति, हंसी)

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