मंगलवार, 15 जुलाई 2014

हास्य रचनाः संजीव

हास्य रचनाः नियति संजीव * सहते मम्मी जी का भाषण, पूज्य पिताश्री का फिर शासन भैया जीजी नयन तरेरें, सखी खूब लगवाये फेरे बंदा हलाकान हो जाये, एक अदद तब बीबी पाये सोचे धौन्स जमाऊं इस पर, नचवाये वह आंसू भरकर चुन्नू-मुन्नू बाल नोच लें, मुन्नी को बहलाये गोद ले कही पड़ोसी कहें न द्ब्बू, लड़ता सिर्फ इसलिये बब्बू ***

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