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बुधवार, 29 जनवरी 2020

छंद सलिला


छंद सलिला

*सात मात्रिक लौकिक जातीय छंद*
प्रकार २१

*१ शुभगति / सुगती छंद*
विधान पदांत ग

सप्त ऋषि हो
शांति-सुख बो
तप करो रे!
दुख हरो रे!
*

*आठ मात्रिक वासव जातीय छंद*
प्रकार ३४

*२ मधुभार / छवि छंद*
विधान पदांत ज
अठ वसु! न हार
निज छवि निहार
हम कर सुधार
भू लें सँवार
*

*नौ मात्रिक आंक जातीय छंद*
प्रकार ५५

*३ गंग छंद*
विधान - पदांत य

जय गंग माता
जय जीव त्राता
सुधि लो हमारी
माँ क्यों बिसारी?
*
*४ निधि छंद*
विधान - पदांत ल
मत जोड़ नौ निधि
श्रम साध्य हर सिधि
लघु ही नहीं लघु
गुरु ही नहीं गुरु
*

*दस मात्रिक दैशिक जातीय छंद*
प्रकार ८९

*५ दीप छंद*
विधान - पदांत नगल

जलाकर दस दीप
हरे तिमिर महीप
सूर्य सम वर तेज
रखे धूप सहेज
*

*ग्यारह मात्रिक रौद्र जातीय छंद*
प्रकार १४४

*६ अहीर छंद*
विधान - पदांत ज

एकादशी अहीर
जगण अंत धर धीर
गौ पालें यदि आप
मिटे शोक दुख शाप
*
*७ शिव / अभीर छंद*
विधान- पदांत सरन

ग्यारह दीपक जला
ज्योतित सब जग बना
रखें शुद्ध भावना
फले मनोकामना
गहें रुद्र की शरण
करें भक्ति का वरण
*
*८ भव छंद*
विधान - पदांत ग, य

ग्यारस का व्रत करें
शिवाशीष नित वरें
भव बंधन न मोहे
गय पदांती सोहे
*

*बारह मात्रिक आदित्य जातीय छंद*
प्रकार - २३३

*९ तोमर छंद*
विधान - पदांत गल

बारह आदित्य श्रेष्ठ
तिमिर हरें सदा ज्येष्ठ
तोमर गुरु लघु पदांत
परहित-पथ वरें कांत
*
*१० ताण्डव छंद*
विधान - पदादि ल, पदांत ल

महादेव ताण्डव कर
अभयदान देते हर
डमरू डिमडिम डमडम
बम भोले शंकर बम
*
*११ लीला छंद*
विधान - पदांत जगण

सलिल ज्योति लिंग नाथ
पद पखार जोड़ हाथ
शक्ति पीठ कीर्ति गान
लीला का कर बखान
*
*१२ नित छंद*
विधान - पदांत रनस

कथ्य लय रस संग हों
भाव ध्वनि सत्संग हों
छंदों में रहो मगन
नये बनें करो जतन
नीति नयी नित न वरो
धैर्य सदा सलिल धरो
*

*तेरह मात्रिक भागवतजातीय छंद*
प्रकार - ३७७

*१३ उल्लाला / चंद्रमणि छंद*
विधान - ग्यारहवीं मात्रा लघु, पदांत नियम नहीं
उल्लाला तेरह कला
ग्यारहवाँ लघु ही भला
मिले चंद्र मणि लें तुरत
गुमे नहीं करिए जुगत
*
*१४ चण्डिका / धरणी छंद*
विधान - पदांत रगण
चण्डिका से दुष्ट डरें
धरणी पर छिपें विचरें

गुरु लघु गुरु रखें पदांत
यत्न मग्न रहें सुशांत
*

*१४ मात्रिक मानव जातीय छंद*
प्रकार ६१०

*१४. कज्जल छंद*
विधान- पदांत गल

हैं भुवन चौदह पति एक
माने सच न बुद्धि विवेक
कभी नहीं सुनी तकरार
राग न द्वेष, जीत न हार
*
१५. सखी / आँसू छंद
विधान - पदांत य, म

सखी न आँसू है माया
कौन साथ तू कह आया?
मनु यम साथ नहीं भाया
क्या खोया है क्या पाया?
*
*१६. विजाति छंद*
विधान - पदादि म, स

विद्या-हीन विजाति वही
मनु गुणवान स्वजाति यही
ज्ञान नीच में यदि देखें
बिना हिचक उससे ले लें
*
*१७.हाकलि छंद*

विधान - चार चौकल + द्विकल, पदांत ग
दिव्या भारत माता है
इसके गुण मनु गाता है
हाकलि चौकल तीन लिए
अंत द्वि कल गुरु भाता है
*
*१८ मानव छंद*
विधान -
जब सब पदों में तीन चौकल न हों

मौसम रंग बदलता है
जाने किसको छलता है
सर्द गर्म बरसाती भी
मन मर्जी से चलता है
*
*१९ मधुमालती छंद*
विधान - यति ७-७, पदांत र

मधुमालती मन मीत है
यति सात-चौदह रीत है
मनु रख रगण पद-अंत में
सुख सजनि सच्चा कंत में
*
*२० सुलक्षण छंद*
विधान - चौकल बाद तथा पदांत गल

रचें सुलक्षण युक्त छंद
भुवन सुकीर्ति सदा अमंद
लोक विलोक विभा अनंत
ध्यान करे प्रभु का सुसंत
*
*२१ मनमोहन छंद*
विधान - यति ७-७, पदांत न

ऋतु वासंती, मदिर मलय
श्वास श्वास में हुई विलय
कर मनमोहन-दर्शन, तर
पावन अवसर मिले न फिर
*
*२२ सरस / मोहन छंद*
विधान - यति ७-७

फेरे-जन्म सरस बंधन
मोहन सदृश नहीं साजन
राधा सजनि लोक भावन
बृज रज गंग सदृश पावन
*
*२३ मनोरम छंद*
विधान - पदादि गुरु, पदांत य, भ
यत्न देते रत्न नाना
आदि गुरु, भय अंत जाना
कर्म कर तू हो न निष्फल
राह पर अविकल चलाचल
*

* पंद्रह मात्रिक तैथिक छंद*
प्रकार - ९८७
*२४ चौबोला छंद*
विधान - पदांत लग

चौबोला तिथि देखे चले
लघु-गुरु अंत न टाले टले
बिना फल चाहे कर्म करे
भव बाधा आकर झट टले
*
*२५. गोपी छंद*
विधान - पदादि त्रिकल, पदांत ग

तिथि हर शुभ गोपी मन कहे
हरि-दर्शन बिन तन-मन दहे
त्रिकल आदि गुरु अंत विराज
आप बनायें बिगड़े काज
*
*२६ चौपई / जयकारी छंद *
विधान - पदांत गल

रखे चौपई गुरु लघु अंत
जयकारी हरि भक्ति अनंत
तिथि अनुकूल जान कर कर्म
तज दे आलस सच्चा धर्म
*
* २७ गुपाल / भुजंगिनी छंद*
विधान - पदांत ज

कला गुपाल निहार सराह
कहे भुजंगिनी वाह वाह
जगण अंत तिथि वार न देख
खींच कर्म से किस्मत रेख
*
*२८ उज्वला मात्रिक छंद*
विधान - पदांत र

रखो रे उज्वला भावना
करो रे निर्मला कामना
रगण अंत रखो, छंद रचो
लय ना भंग हो, सलिल बचो
*
*२९ पुनीत छंद*
विधान - पदादि सम-विषम कल, पदांत त

है पुनीत तिथि पूनम आज
आदि सम-विषम करिए काज
अंत तगण रख रचिए छंद
काव्य नहीं रचिए स्वच्छंद

*

लघुकथा

लघुकथा
छाया
आचार्य संजीव
*
गणतंत्र दिवस, देशभक्ति का ज्वार, भ्रष्टाचार के आरोपों से- घिरा अफसर, मत खरीदकर चुनाव जीता नेता, जमाखोर अपराधी, चरित्रहीन धर्माचार्य और घटिया काम कर रहा ठेकेदार अपना-अपना उल्लू सीधा कर तिरंगे को सलाम कर रहे थे।
आसमान में उड़ रहा तिरंगा निहार रहा था जवान और किसान को जो सलाम नहीं, अपना काम कर रहे थे।
उन्हें देख तिरंगे का मन भर आया, आसमान से बोला "जब तक पसीने की हरियाली, बलिदान की केसरिया क्यारी समय चक्र के साथ है तब तक मुझे कोई झुका नहीं सकता।
सहमत होता हुआ कपसीला बादल तीनों पर कर रहा था छाया।
***
- विश्ववाणी हिंदी संस्थान, ४०१ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन, जबलपुर ४८२००१, ७९९९५५९६१८, ९४२५१८३२४४, salil.sanjiv@gmail.com

मंगलवार, 28 जनवरी 2020

नवगीत

नवगीत
*
बदल गए रे
दिन घूरे के

कैक्टस
दरवाज़े पर शोभित
तुलसी चौरा
घर से बाहर
पिज्जा
गटक रहे कान्हा जू
माखन से
दूरी जग जाहिर
गौरैया
कौए न बैठते
दुर्दिन पनघट-
कंगूरे के

मत पाने 
चाहे जो बोलो
मत पाकर 
निज पत्ते खोलो
सरकारी 
संपत्ति बेच दो
जनगण-मन में 
नफरत घोलो 
लड़ा-भिड़ा 
खेती बिकवा दो 
तार तोड़ दो
तंबूरे के
***
संजीव 

नवगीत

एक रचना 
*
लज्जा विवश
नहा नलके पर
गुंडई का हो रही शिकार

मँहगी प्याज़ प्यार से ज़्यादा
जुमला होता है हर वादा
छप्पन इंची बड़बोलापन
सहनशीलता नहीं राई भर
बब्बा की
तबियत ख़राब तो
नेहरू ही है जिम्मेदार

बात न माने अगर लुगाई
बहू विदेशी दोषी भाई
मोंडा फिरता है आवारा
पप्पू का कसूर है सारा
मोंड़ी भागी
मिसेज वाड्रा
को सूली दे दे सरकार 
***
संजीव 

ग्वारीघाट जबलपुर : सूर्यास्त


ग्वारीघाट जबलपुर : सूर्यास्त 



चित्र पर रचना 

*
लल्ला-लल्ली रोए मचले हमें घूमना मेला
लालू-लाली ने यह झंझट बहुत देर तक झेला
डाँटा-डपटा बस न चला तो दोनों करें विचार

इन्हें मनायें कैसे? लेना पड़े न हमें उधार
होटल या बाजार गए तो चपत लगेगी भारी
खाली जेब मुसीबत होगी मँहगी चीजें सारी
खर्चा कम, मन बहले ज्यादा, ऐसा करो उपाय
चलो नर्मदा तीर नहाएँ-घूमें, है सदुपाय
शिव पूजें पाएँ प्रसाद सूर्योदय देखें सुंदर
बच्चों का मन बहलेगा जब दिख जाएँगे बंदर
स्कूटर पर चारों बैठे मानो हो वह कार
ग्वारीघाट पहुँचकर देखा ऊषा करे सिंगार
नभ पर बैठी माथे पर सूरज का बेंदा चमके
बिंब मनोहर बना नदी में, हीरा जैसे दमके
चहल-पहल थी खूब घाट पर घूम रहे नारी-नर
नहा रहे जो वे गुंजाएँ बम भोले नर्मद हर
पंडे करा रहे थे पूजा, माँग दक्षिणा भारी
पाप-पुण्य का भय दिखलाकर चला चढ़ोत्री आरी
जाने क्या-क्या मंत्र पढ़ें फिर मस्तक मलते चंदन
नरियल चना चिरौंजीदाने पंडित देता गिन गिन
घूम थके भूखे हो बच्चे पैर पटककर बोले
अब तो चला नहीं जाता, कैसे बोलें बम भोले
लालू लाया सेव जलेबी सबने भोग लगाया
नौकायन कर मौज मनाई नर्मदाष्टक गाया
***
संजीव
२७-१-२०२०
७९९९५५९६१८

के के मुहम्मद पद्मश्री


प्रख्यात पुरातत्वविद के के मुहम्मद पद्मश्री इन्टेक जबलपुर में - अयोध्या में राम 
मंदिर की पुरातनता पर सारगर्भित व्याख्यान व चर्चा के बाद बाएँ से प्रो.संजय वर्मा, 
आचार्य संजीव वर्मा सलिल, डॉ.सुधीर तिवारी, पुरातत्वविद् के के मुहम्मद पद्मश्री, 
डॉ आर के शर्मा तथा अन्य विदवज्जन। २६ जनवरी २०२० 

रविवार, 26 जनवरी 2020

गणतंत्र

जनगण सेवी तंत्र बने राधे माधव
लोक जागृति मंत्र बने राधे माधव
प्रजा पर्व गणतंत्र दिवस यह अमर रहे
देश हेतु जन यंत्र बने राधे माधव
हों मतभेद न पर मनभेद कभी हममें
कोटि-कोटि जन एक बने राधे माधव
पक्ष-विपक्ष विनम्र सहिष्णु विवेकी हों
दाऊ-कन्हैया सदृश सदा राधे माधव
हों नर-नारी पूरक शंकर-उमा बनें
संतति सीता-राम रहे राधे माधव
हो संजीवित जग जीवन की जय बोलें
हो न महाभारत भारत राधे माधव
आर्यावर्त बने भारत सुख-शांतिप्रदा
रिद्धि-सिद्धि-विघ्नेश बसें राधे माधव
देव कलम के! शब्द-शक्ति की जय जय हो
शारद सुत हों सदा सुखी राधे माधव
जगवाणी हिंदी की दस दिश जय गूँजे
स्नेह सलिल अभिषेक करे राधे माधव
***
संजीव
गणतंत्र दिवस २०२०
९४२५१८३२४४