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गुरुवार, 11 जुलाई 2019

दोहा सलिला

दोहा सलिला
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पाठक मैं आनंद का, गले मिले आनंद 
बाहों में आनंद हो, श्वास-श्वास मकरंद
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आनंदित आनंद हो, बाँटे नित आनंद
हाथ पसारे है 'सलिल', सुख दो आनंदकंद!
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जब गुड्डो दादी बने, अनुशासन भरपूर
जब दादी गुड्डो बने, हो मस्ती में चूर
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जिया लगा जीवन जिया, रजिया है हर श्वास
भजिया-कोफी ने दिया, बारिश में उल्लास
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पता लापता जब हुआ, उड़ी पताका खूब
पता न पाया तो पता, पता कर रहा डूब 
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