सोमवार, 22 जुलाई 2019

नवगीत कारे बदरा



नवगीत
कारे बदरा 
*
आ रे कारे बदरा
*
टेर रही धरती तुझे 
आकर प्यास बुझा 
रीते कूप-नदी भरने की 
आकर राह सुझा 
ओ रे कारे बदरा 
*
देर न कर अब तो बरस 
बजा-बजा तबला 
बिजली कहे न तू गरज 
नारी है सबला 
भा रे कारे बदरा 
*
लहर-लहर लहरा सके 
मछली के सँग झूम 
बीरबहूटी दूब में 
नाचे भू को चूम 
गा रे कारे बदरा 
*
लाँघ न सीमा बेरहम 
धरा न जाए डूब 
दुआ कर रहे जो वही 
मनुज न जाए ऊब 
जारे कारे बदरा 
*
हरा-भरा हर पेड़ हो 
नगमे सुना हवा 
'सलिल' बूंद नर्तन करे 
गम की बने दवा
जारे कारे बदरा
*****
२२-७-२०१६

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