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मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026

मैकाले, शिक्षा नीति

Minute on Indian Education थॉमस बेबिंगटन मैकाले, वर्ष १८३५, पृष्ठ ९  

मैकाले गवर्नर जनरल की काउंसिल में लॉ मेम्बर और पब्लिक इंस्ट्रक्शन कमेटी के प्रसिडेंट थे। तब साल १८१३ के एक एक्ट में शिक्षा पर ख़र्च को लेकर बहस हो रही थी। कमेटी में लोग इस बात को लेकर बँटे थे। आधे सदस्यचाहते थे कि संस्कृत और अरबी शिक्षा पर ख़र्च हो आधे चाहते थे कि ख़र्च अंग्रेज़ी और पश्चिमी ज्ञान-विज्ञान पर हो। मैकाले ने इस विषय पर एक मेमोरेंडम दिया जिसे मिनट कहा गया। इस मिनट के आख़िरी पैराग्राफ में मैकाले ने कहा- ''If the decision of His Lordship in Council should be such as I anticipate, I shall enter on the performance of my duties with the greatest zeal and alacrity. If, on the other hand,it be the opinion of the Government that the present system ought to remain unchanged, I beg that I may be permitted to retire from the chair of the Committee.''

जैसा कि मैं अनुमान करता हूँ यदि लॉर्ड्शिप और उनकी परिषद 

I believe that the present system tends not to accelerate the progress of truth but to delay the natural death of expiring errors.

उन्होंने   Arabic और Sanskrit learning को Expiring Errors कहा। ज़ालिम ने क्या शब्द प्रयोग किया है मज़ा आ गया Expiring Errors ।

अब शुरुआत पर आ जाते हैं। बात शुरू होती है चार्टर एक्ट के इस प्रोविजन को लेकर कि इसका अर्थ क्या है।


"for the revival and promotion of literature, and the encouragement of the learned natives of India, and for the introduction and promotion of a knowledge of the sciences among the inhabitants of the British territories."

यहाँ दो फ्रेज हैं Promotion of literature तथा Promotion of the sciences

मैकाले ने कहा अक़्ल के दुश्मनों क़ानून में ये लिखा है और आप क्या कर रहे हो? आप Literature का मतलब सिर्फ़ Arabic and Sanskrit literature समझ रहे हो। आप दो ग़लती कर रहे हो । एक तो आपको क़ानून की समझ नहीं है। दूसरी बात जिस पर आप ख़र्च कर रहे हो उससे कुछ फ़ायदा नहीं हो रहा Natives को। जॉन लॉक क्यों न पढ़ाया जाए? मिल्टन क्यों नहीं? न्यूटन क्यों नहीं?

वो एक उदाहरण देते हैं कि मान लो आपने एक सैनिटोरियम खोला ये सोचकर कि इससे लोगों का स्वास्थ्य ठीक रहेगा लेकिन अब उसका रिजल्ट ठीक नहीं तो क्या चिपके रहोगे इस पर ये कहकर कि बहुत सालों से ये हो रहा है तो चलने दो। यहाँ ध्यान देने वाली बात है वो अभी अपने देश के मूर्खों की तरफ़ देखकर बात कर रहे हैं भारतीय देशी मूर्खों की तरफ़ देखकर नहीं।

एक और उदाहरण देते हैं कि देखो Edward Jenner ने स्मॉल पॉक्स की वैक्सीन बनाई मान लो इससे पहले किसी सरकार ने क़ानून बनाया हो कि इस बीमारी से बचने के लिए लोगों को Variolation से इनोक्युलेट किया जाए( ये पहले का ख़तरनाक तरीका था जिसमें Pus को बीमार आदमी से लेकर स्वस्थ आदमी में डाला जाता था अब तो वैक्सीन आ गई है जिसमें Weakened pathogen प्रयोग करते हैं) तो क्या वैक्सीन आने पर भी आप ज़िद करोगे कि हम तो पुराना तरीका ही प्रयोग करेंगे?

अब वो एक विवादित बात कहते हैं


I have conversed, both here and at home, with men distinguished by their proficiency in the Eastern tongues. I am quite ready to take the oriental learning at the valuation of the orientalists themselves. I have never found one among them who could deny that a single shelf of a good European library was worth the whole native literature of India and Arabia.


यही कि इंडिया और अरेबिया का पूरा लिटरेचर एक अच्छी यूरोपियन लाइब्रेरी के एक शेल्फ में रखी किताबों के बराबर है। अब आगे वो प्रशंसा भी करते हैं । देख लो देख लो क्या पढ़ लो ओरिजिनल दस्तावेज़ में


It will hardly be disputed, I suppose, that the department of literature in which the Eastern writers stand highest is poetry.


पोएट्री में तो वो हमें ही ऊँचा मान रहा है ( कालिदास वगैरह) अब आगे


But when we pass from works of imagination to works in which facts are recorded and general principles investigated, the superiority of the Europeans becomes absolutely immeasurable.


यहाँ वो आधुनिक ज्ञान विज्ञान की बात कर रहे हैं। तो उसमें तो भारत उस वक्त यूरोप के मुक़ाबले कहीं नहीं था और आज भी नहीं है। मैकाले ने क्या ग़लत कहा? अब संस्कृत में ये ज्ञान उपलब्ध नहीं है तो जिसमें उपलब्ध है उसको पढ़ाया जाए। वो कहते हैं कि आप पब्लिक के पैसे को कहाँ ख़र्च कर रहे हो? ये पढ़ाने में कि तीस फीट का राजा तीस हज़ार साल तक राज करता है। भूगोल के नाम पर मक्खन भरे समुद्र के बारे में पढ़ाते हो। मैकाले कहते हैं कि भाई हमें देखो हम ख़ुद अपने देश की भाषा से चिपके नहीं रहे। एक वक्त पर ज्ञान का भंडार ग्रीक और रोमन वर्क्स में था तो हमने उनकी भाषा सीखी तो यहाँ भारतीयों को नया ज्ञान क्यों न दिया जाए।

मैकाले कहते हैं कि मेरा बस चले तो मैं कलकत्ता के सारे मदरसे और संस्कृत कॉलेज बंद कर दूँ। उनका कहना था कि एक लिमिटेड अमाउंट हमारे पास है और उसे हमें संस्कृत और अरेबिक साहित्य पढ़कर बर्बाद नहीं करना चाहिए बल्कि अंग्रेजी माध्यम से विज्ञान की शिक्षा देनी चाहिए। वो कहते हैं कि कितनी बड़ी मूर्खता है कि आप इन्हें संस्कृत पढ़ा रहे हो और Stipend देते हो और ये ही लोग गवर्नर जनरल के पास पिटीशन डालते हैं कि अब हमें नौकरी भी दो। अर्थात ये शिक्षा बेकार है। दूसरी तरफ़ अंग्रेज़ी माध्यम से पढ़ने के लिए भारत का कुलीन वर्ग पैसे दे रहा है। तो कौन सी शिक्षा काम की है?

एक जगह वो कहते हैं कि हमें भारतीयों का Intellectual taste नहीं उनकी Intellectual health का ध्यान रखना है। कितनी बड़ी बात कही है।

जिस बात को लेकर अक्सर रुदाली होती है वो ये है।


it is impossible for us, with our limited means, to attempt to educate the body of the people. We must at present do our best to form a class who may be interpreters between us and the millions whom we govern, -a class of persons Indian in blood and colour, but English in tastes, in opinions, in morals and in intellect.


उन्होंने कहा हमारे पास थोड़ा पैसा है तो सबको तो ये शिक्षा नहीं दे पाएंगे लेकिन हमें एक ऐसी क्लास तैयार करनी चाहिए जो हमारे और बाक़ी के नेटिव्स के बीच बातचीत का ज़रिया बने और जो रंग और ख़ून से भारतीय हो लेकिन इंटेलेक्ट और मोरल्स, राय इत्यादि को लेकर इंग्लिश हो। इसमें क्या ग़लत है कि आपकी सोच पर जॉन लॉक का असर पड़े, न्यूटन का असर पड़े?

ये जो सुषमा स्वराज थी , अरुण जेटली जिन्होंने मरने से पहले अमेरिका में इलाज कराया। इन राष्ट्रवादियों को आप Taste में इंडियन मानोगे या इंग्लिश? सोनिया गाँधी ने इलाज विदेश में कराया, ग़ुलाम नबी आज़ाद ने विदेश में इलाज कराया । बच्चे इनके विदेशों में पढ़ते हैं और तुम्हें देशी पाठ पढ़ाते हैं। जो लाखों का सूट पहनते हैं। 4200 करोड़ का B 777 जहाज हमारे प्रधानमंत्री यूज़ करते हैं। ये कैसा Taste है? इंडियन या इंग्लिश?

एक जगह तो वो गुस्से में कहते हैं कि क्या हम इस बात के लिए युवाओं की ज़वानी बर्बाद कर दे कि कैसे गधे को छूकर अपने को शुद्ध करे या एक बकरा मारने पर कैसे इस अपराध से मुक्ति पाने के लिए किस वैदिक टेक्स्ट को बार बार पढ़े।

उनके सारे तर्कों को और उदाहरणों को मैंने नहीं लिखा बो काफ़ी बड़ा हो जाता लेकिन ये कमाल का दस्तावेज है हर भारतीय को पढ़ना चाहिए।