बुधवार, 31 जुलाई 2019

मुक्तिका

मुक्तिका:
संजीव 
*
याद जिसकी भुलाना मुश्किल है 
याद उसको न आना मुश्किल है
.
मौत औरों को देना है आसां
मौत को झेल पाना मुश्किल है
.
खुद को कहता रहा मसीहा जो
उसका इंसान होना मुश्किल है
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तुमने बोले हैं झूठ सौ-सौ पर
एक सच बोल सकना मुश्किल है
.
अपने अधिकार चाहते हैं सभी
गैर को हक़ दिलाना मुश्किल है
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salil.sanjiv@gmail.com

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