रविवार, 21 जुलाई 2019

मुक्तिका



मुक्तिका 
*
कल दिया था, आज लेता मैं सहारा 
चल रहा हूँ, नहीं अब तक तनिक हारा 
सांस जब तक, आस तब तक रहे बाकी 
जाऊँगा हँस, ईश ने जब भी पुकारा 
देह निर्बल पर सबल मन, हौसला है 
चल पड़ा हूँ, लक्ष्य भूलूँ? ना गवारा 
पाँव हैं कमजोर तो बल हाथ का ले 
थाम छड़ियाँ खड़ा पैरों पर दुबारा 
साथ दे जो मुसीबत में वही अपना
दूर बैठा गैर, चुप देखे नज़ारा
मैं नहीं निर्जीव, हूँ संजीव जिसने 
अवसरों को खोजकर फिर-फिर गुहारा 
शक्ति हो तब संग जब कोशिश करें खुद 
सफलता हो धन्य जब मुझको निहारा 
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