गुरुवार, 11 जुलाई 2019

दोहा यमक

दोहा यमक मिले गले 
तारो! तारोगे किसे, तर न सके खुद आप.
शिव जपते हैं उमा को, उमा भजें शिव नाम.
*
चंद चंद तारों सहित, करे मौन गुणगान
रजनी के सौंदर्य का, जब तक हो न विहान
*
एक दोहा 
जब भी 'मैं' की छूटती, 'हम' की हो अनुभूति.
तब ही 'उस' से मिलन हो, सबकी यही प्रतीति..
७-७-२०१०

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