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गुरुवार, 7 फ़रवरी 2019

एक रचना राज को पाती

एक रचना 
राज को पाती: 
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सारा भारत  एक हैं, राज कौन है गैर? 
महाराष्ट्र क्यों राष्ट्र की, नहीं चाहता खैर? 

कौन पराया तू बता?, और सगा है कौन? 
राज हुआ नाराज क्यों ख़ुद से?रह अब मौन. 

उत्तर-दक्षिण शीश-पग, पूरब-पश्चिम हाथ. 
ह्रदय मध्य में ले बसा, सब हों तेरे साथ. 

भारत माता कह रही, सबका बन तू मीत. 
तज कुरीत, सबको बना अपना, दिल ले जीत. 

सच्चा राजा वह करे जो हर दिल पर राज. 
‘सलिल’ तभी चरणों झुकें, उसके सारे ताज.
६.२.२०१० 
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