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शुक्रवार, 3 अगस्त 2018

varsha geet

वर्षा गीत  
*
बारिश तो अब भी होती है 
लेकिन बच्चे नहीं खेलते. 
*
नाव बनाना 
कौन सिखाये?
बहे जा रहे समय नदी में.
समय न मिलता रिक्त सदी में.
काम न कोई
किसी के आये.
अपना संकट आप झेलते
बारिश तो अब भी होती है
लेकिन बच्चे नहीं खेलते.
*
डेंगू से भय-
भीत सभी हैं.
नहीं भरोसा शेष रहा है.
कोइ न अपना सगा रहा है.
चेहरे सबके
पीत अभी हैं.
कितने पापड विवश बेलते
बारिश तो अब भी होती है
लेकिन बच्चे नहीं खेलते.
*
उतर गया
चेहरे का पानी
दो से दो न सम्हाले जाते
कुत्ते-गाय न रोटी पाते
कहीं न बाकी
दादी-नानी.
चूहे भूखे दंड पेलते
बारिश तो अब भी होती है
लेकिन बच्चे नहीं खेलते.
*
salil.sanjiv@gmail.com
#दिव्यनर्मदा
divyanarmada.blogspot.com
#हिंदी_ब्लॉगर

बुधवार, 4 जुलाई 2018

वर्षा गीत

गीत:
चुभती बूँदें
अविनाश ब्योहार
*
बुरे हुए दिन
चुभती बूँदें
शूल सी!

दामिनी सा
दुःख तड़का
जेहन में!
ख्वाबों की
जागीर है
रेहन में!!

अल्पवृष्टि लगती
मौसम की
भूल सी!

कैसा मौसम
आया कि
मेह न बरसे!
नदी, ताल, विटप
सहमें हैं
डर से!!

खेतिहर की
सूरत है
मुरझाये फूल सी!
*
रायल एस्टेट, कटंगी मार्ग 
माढ़ोताल, जबलपुर, ९८२६७९५३७२