शनिवार, 14 अप्रैल 2018

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ईकाई स्थापना : विश्ववाणी हिंदी संस्थान की ईकाई स्थापित कर हिंदी भाषा और साहित्य के विकास, संवर्धन और सृजन में सहायक हों। पूर्व संचालित संस्थाएं भी सम्बद्ध होकर ईकाई बन बन सकती हैं। संस्थान का उद्देश्य रचनाकारों की प्रतिभा को निखारना, कृति के प्रकाशन से पहले संशोधन सुझाना, सृजन को न्यूनतम लागत में प्रकाशन-सुविधा देना, प्रकाशित साहित्य पर चर्चा-समीक्षा करवाना, रचनाकारों को मार्गदर्शन व परामर्श उपलब्ध कराना, शोध में सहायता देना तथा साहित्य को समाज से जोड़ना है। अपने शहर में संस्थान की ईकाई स्थापित करने हेतु संपर्क करें। साहित्य की किसी विधा में लेखन, प्रशिक्षण, पुस्तक की पाण्डुलिपि संशोधन, भूमिका लेखन, प्रकाशन, समीक्षा, गद्यानुवाद, पद्यानुवाद आदि हेतु संपर्क करें।
सामूहिक संकलन: संस्थान द्वारा दोहा, लघुकथा, नवगीत, व्यंग्य लेख, छंद मुक्त कविता, श्रृंगार गीत, हास्य कविता, मुक्तक, बालगीत, कहानी, भक्ति गीत, हाइकु, कुण्डलिया, हिन्दी-गीत तथा राष्ट्रीय गीत संकलन प्रकाशित किये जाना हैं। इन संकलनों का संपादन करने के इच्छुक जन तथा सहभागी रचनाकार तुरंत संपर्क करें 
- : दोहा संकलन : -
विश्ववाणी हिंदी संस्थान जबलपुर के तत्वावधान में दोहा-लेखन तथा दोहाकारों को प्रोत्साहित तथा प्रतिष्ठित करने का उद्देश्य लेकर समकालिक वरिष्ठ तथा नवोदित दोहाकारों के दोहा-शतकों का संकलन शीघ्र ही प्रकाशित किया जा रहा है। संकलन में सम्मिलित प्रत्येक दोहाकार के १०० दोहे, चित्र, संक्षिप्त परिचय (नाम, जन्म तिथि व स्थान, माता-पिता, जीवनसाथी व काव्य गुरु के नाम, शिक्षा, लेखन विधा, प्रकाशित कृतियाँ, उपलब्धि, पूरा पता, चलभाष, ईमेल आदि) १० पृष्ठों में प्रकाशित किए जाएँगे। हर सहभागी के दोहों पर संक्षिप्त विमर्शात्मक टीप तथा दोहा पर आलेख भी होगा। संपादन वरिष्ठ दोहाकार आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' द्वारा किया जा रहा है। प्रत्येक सहभागी ३०००/- अग्रिम सहयोग राशि देना बैंक, राइट टाउन शाखा जबलपुर IFAC: BKDN 0811119 में संजीव वर्मा के खाता क्रमांक 111910002247 में जमाकर पावती तुरंत ईमेल करें। संकलन प्रकाशित होने पर हर सहभागी को सम्मान पत्र तथा ११ प्रतियाँ निशुल्क भेंट की / भेजी जाएँगी। प्राप्त दोहों में आवश्यकतानुसार संशोधन का अधिकार संपादक को होगा। दोहे unicode में भेजने हेतु ईमेल- salil.sanjiv@gmail.com चलभाष ७९९९५५९६१८, ९४२५१८३२४४ । भारतीय बोलियों / अहिन्दी भाषाओँ के दोहे देवनागरी लिपि में आंचलिक शब्दों के अर्थ पाद टिप्पणी में देते हुए भेजें।
अब तक निम्न दोहाकारों के दोहे के दोहे यथावश्यक संशोधित / सम्पादित व अनुमोदित किए जा चुके हैं। वर्ण क्रमानुसार नाम - सर्व श्री / सुश्री / श्रीमती १. अखिलेश खरे 'अखिल', २. अनिल कुमार मिश्र, ३. अरुण अर्णव खरे, ४. अरुण शर्मा, ५. आभा सक्सेना 'दूनवी', ६. उदयभानु तिवारी 'मधुकर', ७ कालिपद प्रसाद, ८ गोपालकृष्ण भट्ट 'आकुल', ९ छगनलाल गर्ग 'विज्ञ', १०. छाया सक्सेना 'प्रभु', ११. जयप्रकाश श्रीवास्तव, १२. त्रिभवन कौल, १३ नीता सैनी, १४. प्रेमबिहारी मिश्र, १५. बसंत शर्मा, १६ मिथिलेश बड़गैया, १७. रामेश्वर प्रसाद सारस्वत, १८. रीता सिवानी, १९. विजय बागरी, २०. विनोद जैन 'वाग्वर', २१. श्यामल सिन्हा, २२. शुचि भवि, २३. श्रीधर प्रसाद द्विवेदी, २४. साहबलाल दशरिये, २५. सुनीता सिंह, २६. सुरेश कुशवाहा 'तन्मय', २७. डॉ. हरि फैजाबादी, २८. हिमकर श्याम । आप सब उक्तानुसार सहयोग निधि भेज सकते हैं। सबसे सहयोग निधि प्राप्त होते ही संकलन प्रथम खंड का मुद्रण कार्य आरंभ हो जाएगा।
निम्न दोहाकारों ने सहभागिता हेतु सहमति दी है दोहों की प्रतीक्षा है। कृपया, शीघ्रता करें। दोहे व निधि एक साथ भेज दें। विलंब होने पर अगले संकलन में स्थान मिल सकेगा। सर्व श्री / सुश्री / श्रीमती ओमप्रकाश शुक्ल, कांति शुक्ल, गोप कुमार मिश्र, निरुपमा चतुर्वेदी, रमेश विनोदी, रामकुमार चतुर्वेदी, रामलखन सिंह चौहान, लता यादव, विशम्भर शुक्ला, शोभित वर्मा, शंभू सोनी, सरस्वती कुमारी, सविता तिवारी मारीशस, सुमन श्रीवास्तव, सुरेशपाल वर्मा 'जसाला'।
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दोहा लेखन विधान
१. दोहा द्विपदिक छंद है। दोहा में दो पंक्तियाँ (पद) होती हैं। हर पद में दो चरण होते हैं। 
२. दोहा मुक्तक छंद है। कथ्य (जो बात कहना चाहें वह) एक दोहे में पूर्ण हो जाना चाहिए।
३. विषम (पहला, तीसरा) चरण में १३-१३ तथा सम (दूसरा, चौथा) चरण में ११-११ मात्राएँ होती हैं।
४. तेरह मात्रिक पहले तथा तीसरे चरण के आरंभ में एक शब्द में जगण (लघु गुरु लघु) वर्जित होता है।
५. सम चरणों के अंत में गुरु लघु मात्राएँ आवश्यक हैं।
६. विषम चरणों की ग्यारहवीं मात्रा लघु हो तो लय भंग होने की संभावना कम (समाप्त नहीं) हो जाती है।
७. हिंदी दोहाकार हिंदी व्याकरण नियमों का पालन करें। दोहा में वर्णिक छंद की तरह लघु को गुरु या गुरु को लघु पढ़ने की छूट नहीं होती।
८. हिंदी में खाय, मुस्काय, आत, भात, आब, जाब, डारि, मुस्कानि, हओ, भओ जैसे देशज / आंचलिक शब्द-रूपों का उपयोग न करें। बोलियों में दोहा रचना करते समय उस बोली का यथासंभव शुद्ध रूप व्यवहार में लाएँ।
९. श्रेष्ठ दोहे में लाक्षणिकता, संक्षिप्तता, मार्मिकता (मर्मबेधकता), आलंकारिकता, स्पष्टता, पूर्णता, सरलता तथा सरसता होना चाहिए।
१०. दोहे में संयोजक शब्दों और, तथा, एवं आदि का प्रयोग यथासंभव न करें। औ' वर्जित 'अरु' स्वीकार्य। 'न' सही, 'ना' गलत। 'इक' गलत।
११. दोहे में कोई भी शब्द अनावश्यक न हो। शब्द-चयन ऐसा हो जिसके निकालने या बदलने पर दोहा अधूरा सा लगे।
१२. दोहा में विराम चिन्हों का प्रयोग यथास्थान अवश्य करें।
१३. दोहे में कारक (ने, को, से, के लिए, का, के, की, में, पर आदि) का प्रयोग कम से कम हो।
१४. दोहा सम तुकांती छंद है। सम चरण के अंत में समान तुक आवश्यक है।
२. कम समय में बोले जानेवाले वर्ण या अक्षर की एक तथा अधिक समय में बोले जानेवाले वर्ण या अक्षर की दो मात्राएँ गिनी जाती हैंं।
१५. दोहा में लय का महत्वपूर्ण स्थान है। लय के बिना दोहा नहीं कहा जा सकता।
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मात्रा गणना नियम
१. किसी ध्वनि-खंड को बोलने में लगनेवाले समय के आधार पर मात्रा गिनी जाती है।
२. कम समय में उच्चारित किये जानेवाले अक्षर की १ तथा अपेक्षाकृत अधिक समय में उच्चारित किये जानेवाले शब्द की दो मात्रा गिनें। 
३. अ, इ, उ, ऋ तथा इन मात्राओं से युक्त वर्ण की एक मात्रा गिनें। उदाहरण- अब = ११ = २, इस = ११ = २, उधर = १११ = ३, ऋषि = ११= २, उऋण १११ = ३ आदि।
४. शेष वर्णों की दो-दो मात्रा गिनें। जैसे- आम = २१ = ३, काकी = २२ = ४, फूले २२ = ४, कैकेई = २२२ = ६, कोकिला २१२ = ५, और २१ = ३आदि।
५. शब्द के आरंभ में आधा या संयुक्त अक्षर हो तो उसका कोई प्रभाव नहीं होगा। जैसे गृह = ११ = २, प्रिया = १२ =३ आदि।
६. शब्द के मध्य में आधा अक्षर हो तो उसे पहले के अक्षर के साथ गिनें। जैसे- क्षमा १+२, वक्ष २+१, विप्र २+१, उक्त २+१, प्रयुक्त = १२१ = ४ आदि।
७. रेफ को आधे अक्षर की तरह गिनें। बर्रैया २+२+२आदि।
८ अपवाद स्वरूप कुछ शब्दों के मध्य में आनेवाला आधा अक्षर बादवाले अक्षर के साथ गिना जाता है। जैसे- कन्हैया = क+न्है+या = १२२ = ५आदि।
९. अनुस्वर (आधे म या आधे न के उच्चारण वाले शब्द) के पहले लघु वर्ण हो तो गुरु हो जाता है, पहले गुरु होता तो कोई अंतर नहीं होता। यथा- अंश = अन्श = अं+श = २१ = ३. कुंभ = कुम्भ = २१ = ३, झंडा = झन्डा = झण्डा = २२ = ४आदि।
१०. अनुनासिक (चंद्र बिंदी) से मात्रा में कोई अंतर नहीं होता। धँस = ११ = २आदि। हँस = ११ =२, हंस = २१ = ३ आदि।
मात्रा गणना करते समय शब्द का उच्चारण करने से लघु-गुरु निर्धारण में सुविधा होती है। इस सारस्वत अनुष्ठान में आपका स्वागत है। कोई शंका होने पर संपर्क करें।
अन्य संकलन 

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