शुक्रवार, 16 मार्च 2018

दोहा दुनिया/एकादशी

- : विश्व वाणी हिंदी संस्थान जबलपुर :-
समकालिक दोहा संकलन- "दोहा दुनिया"
जन्म ब्याह राखी तिलक, गृह-प्रवेश त्यौहार २१ २१ २२ १११, ११ १२१ २२१
सलिल बचा पौधे लगा दें पुस्तक उपहार १११ १२ २११ १२, २ २२ ११२१
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विश्ववाणी हिंदी संस्थान जबलपुर के तत्वावधान में समकालिक दोहाकारों की प्रतिनिधि दोहा संकलन शृंखला 'दोहा दुनिया ' शीघ्र ही प्रकाशित की जा रही है। शृंखला के अंतर्गत ११-११ दोहाकारों की 'दोहा एकादशी' प्रकाशित की जा रही हैं। सम्मिलित प्रत्येक दोहाकार के १०० दोहे, चित्र, संक्षिप्त परिचय (नाम, जन्मतिथि व स्थान, माता-पिता, जीवनसाथी के नाम, शिक्षा, लेखन विधा, प्रकाशित कृतियाँ, उपलब्धि, पूरा पता, चलभाष, ईमेल आदि) १० पृष्ठों में प्रकाशित किया जाएगा। हर सहभागी के दोहों की संक्षिप्त समीक्षा तथा दोहा पर आलेख भूमिका में होगा। संपादन वरिष्ठ दोहाकार आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' द्वारा किया जा रहा है। प्रत्येक सहभागी को ३०००/- सहयोग राशि अग्रिम देना बैंक, राइट टाउन शाखा जबलपुर IFAC: BKDN 0811119 में संजीव वर्मा के खाता क्रमांक 111910002247 में जमाकर पावती तुरंत ईमेल करना है। संकलन प्रकाशित होने पर हर सहभागी को सम्मान पत्र तथा १० प्रतियाँ निशुल्क भेंट की जाएँगी। प्राप्त दोहों के शिल्प, भाषा आदि में आवश्यकतानुसार संशोधन का अधिकार संपादक को होगा। दोहे unicode में भेजने हेतु ईमेल- salil.sanjiv@gmail.com चलभाष ७९९९५५९६१८, ९४२५१८३२४४।
निम्न सहभागियों के दोहे स्वीकृत, उक्तानुसार सहभागिता निधि आमंत्रित है। निधि प्राप्त होने के क्रम में ही संकलन में स्थान निश्चित होगा। वर्ण क्रमानुसार नाम - [अ] सौ दोहे तथा राशि प्राप्त: १. छाया सक्सेना, २. सुरेश कुशवाहा 'तन्मय', ३. विजय बागरी, ४. मिथलेश बड़गैया, ५.
सौ दोहे प्राप्त: सर्व श्री / सुश्री / श्रीमती १. अखिलेश खरे 'अखिल', २. अनिल मिश्र ३.अरुण अर्णव खरे ४. अरुण शर्मा ५. उदयभानु तिवारी 'मधुकर' ६. कालिपद प्रसाद, ७. डॉ. गोपाल कृष्ण भट्ट आकुल, ८. छगनलाल गर्ग, ९. जयप्रकाश श्रीवास्तव १०. डॉ. त्रिभवन कौल, ११. प्रेमबिहारी मिश्र, १२. बसंत शर्मा, १३.रामेश्वर प्रसाद सारस्वत, १४. श्यामल सिन्हा, १५. श्रीधर प्रसाद द्विवेदी १६. विनोद जैन वाग्वर, १७. सरस्वती कुमारी, १८. सुनीता सिंह, १९.
दोहे अप्राप्त: लता यादव, प्रो. विशम्भर शुक्ला, शोभित वर्मा, नवीन चतुर्वेदी, डॉ. सुरेशपाल वर्मा 'जसाला', डॉ. पुष्पा जोशी, नीता सैनी, सुबोध श्रीवास्तव, सुनीता सिंह, सविता तिवारी मारीशस, रमेश विनोदी, वसुधा कनुप्रिया, मंजू वशिष्ठ, वीणा तंवर, साधना शर्मा, निरुपमा चतुर्वेदी, प्रमिला पाण्डे, विनीता श्रीवास्तव,
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हिंदी आटा माढ़िए, उर्दू मोयन डाल २२ २२ २१२, २२ २११ २१
सलिल संस्कृत सान दे, पूड़ी बने कमाल १११ २१११ २१ २, २२ १२ १२१
दोहा लेखन विधान
१. दोहा द्विपदिक छंद है। दोहा में दो पंक्तियाँ (पद) होती हैं।
२. हर पद में दो चरण होते हैं।
३. विषम (पहला, तीसरा) चरण में १३-१३ तथा सम (दूसरा, चौथा) चरण में ११-११ मात्राएँ होती हैं।
४. तेरह मात्रिक पहले तथा तीसरे चरण के आरंभ में एक शब्द में जगण (लघु गुरु लघु) वर्जित होता है।
५. विषम चरणों की ग्यारहवीं मात्रा लघु हो तो लय भंग होने की संभावना कम हो जाती है।
६. सम चरणों के अंत में गुरु लघु मात्राएँ आवश्यक हैं।
७. हिंदी में खाय, मुस्काय, आत, भात, डारि, मुस्कानि जैसे देशज क्रिया-रूपों का उपयोग न करें।
८. दोहा मुक्तक छंद है। कथ्य (जो बात कहना चाहें वह) एक दोहे में पूर्ण हो जाना चाहिए।
९. श्रेष्ठ दोहे में लाक्षणिकता, संक्षिप्तता, मार्मिकता (मर्मबेधकता), आलंकारिकता, स्पष्टता, पूर्णता तथा सरसता होना चाहिए।
१०. दोहे में संयोजक शब्दों और, तथा, एवं आदि का प्रयोग यथा संभव न करें। औ' वर्जित 'अरु' स्वीकार्य।
११. दोहे में कोई भी शब्द अनावश्यक न हो। हर शब्द ऐसा हो जिसके निकालने या बदलने पर दोहा न कहा जा सके।
१२. दोहे में कारक (ने, को, से, के लिए, का, के, की, में, पर आदि)का प्रयोग कम से कम हो।
१३. दोहा में विराम चिन्हों का प्रयोग यथास्थान अवश्य करें।
१४. दोहा में सम चरण के अंत में समान तुक आवश्यक है।
१५. दोहा में लय जरूरी है। लय के बिना दोहा नहीं हो सकता।
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मात्रा गणना नियम
कौन किसी का सगा है, कहो कौन है गैर। २१ १२ २ १२ २, १२ २१ २ २१
आना-जाना अकेले, माँगो सबकी खैर।। २२ २२ १२२, २२ ११२ २१
१. किसी ध्वनि-खंड को बोलने में लगनेवाले समय के आधार पर मात्रा गिनी जाती है।
२. कम समय में बोले जानेवाले वर्ण या अक्षर की एक तथा अधिक समय में बोले जानेवाले वर्ण या अक्षर की दो मात्राएँ गिनी जाती हैंं।
३. अ, इ, उ, ऋ तथा इन मात्राओं से युक्त वर्ण की एक मात्रा गिनें। उदाहरण- अब = ११ = २, इस = ११ = २, उधर = १११ = ३, ऋषि = ११= २, उऋण १११ = ३ आदि।
४. शेष वर्णों की दो-दो मात्रा गिनें। जैसे- आम = २१ = ३, काकी = २२ = ४, फूले २२ = ४, कैकेई = २२२ = ६, कोकिला २१२ = ५, और २१ = ३आदि।
५. शब्द के आरंभ में आधा या संयुक्त अक्षर हो तो उसका कोई प्रभाव नहीं होगा। जैसे गृह = ११ = २, प्रिया = १२ =३ आदि।
६. शब्द के मध्य में आधा अक्षर हो तो उसे पहले के अक्षर के साथ गिनें। जैसे- क्षमा १+२, वक्ष २+१, विप्र २+१, उक्त २+१, प्रयुक्त = १२१ = ४ आदि।
७. रेफ को आधे अक्षर की तरह गिनें। बर्रैया २+२+२आदि।
८. हिंदी दोहाकार हिंदी व्याकरण नियमों का पालन करें। दोहा में वर्णिक छंद की तरह लघु को गुरु या गुरु को लघु पढ़ने की छूट नहीं होती।
९. अपवाद स्वरूप कुछ शब्दों के मध्य में आनेवाला आधा अक्षर बादवाले अक्षर के साथ गिना जाता है। जैसे- कन्हैया = क+न्है+या = १२२ = ५आदि।
१०. अनुस्वर (आधे म या आधे न के उच्चारण वाले शब्द) के पहले लघु वर्ण हो तो गुरु हो जाता है, पहले गुरु होता तो कोई अंतर नहीं होता। यथा- अंश = अन्श = अं+श = २१ = ३. कुंभ = कुम्भ = २१ = ३, झंडा = झन्डा = झण्डा = २२ = ४आदि।
११. अनुनासिक (चंद्र बिंदी) से मात्रा में कोई अंतर नहीं होता। धँस = ११ = २आदि। हँस = ११ =२, हंस = २१ = ३ आदि।
मात्रा गणना करते समय शब्द का उच्चारण करने से लघु-गुरु निर्धारण में सुविधा होती है। इस सारस्वत अनुष्ठान में आपका स्वागत है।
दोहा दुनिया अनूठी, ब्रम्हा दोहाकार २२ ११२ १२२, २२ २२२१
सत-शिव-सुंदर कथ्य हो, हरि लय भाव अपार ११ ११ २११ २१ २, ११ ११ २१ १२१
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