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रविवार, 13 अगस्त 2017

doha

दोहांजलि गोरखपुर में दिवंगत मासूमों के प्रति :
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बिना खिले मुरझा गए, हाय राम! क्यों फूल?
शिव जी! जो दोषी उन्हें, मिटा मिला दो धूल।
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योगी में ममता नहीं, समझ न पता दर्द।
बच्चे असमय मरे वे, भाषण देते सर्द
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दोषी शासन-प्रशासन, माँगें क्षमा तुरंत।
मंत्री-सचिवों को करें बाहर, तत्क्षण कन्त
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ममता के आँसू नहीं, थमाते है निरुपाय।
योगी जी बचिए, तुम्हें हाय! न यह खा जाए
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राम-कृष्ण दोनों मरे, सीता-राधा संग।
दोष न कोई मानता, देख विधाता दंग
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मंत्री-सचिवों को मिले, प्रभु! ऐसा ही शोक।
तब जागे संवेदना, न्य्याय चाहता लोक
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समरथ का होता नहीं, तुलसी कहते दोष।
यही सत्य है आज का, मंत्री हैं मदहोश
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थू-थू-थू सरकार पर, भाषणबाज हजार।
दोष हुआ, अक्षम्य यह, घर-घर हाहाकार
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salil.sanjiv@gmail.com
http://divyanarmada.blogspot.com
#हिंदी_ब्लॉगर


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